Dhanbad : झारखंड के कोयला क्षेत्र में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे के ईसीएल और बीसीसीएल दौरे को काफी अहम माना जा रहा है। खासकर झरिया पुनर्वास योजना को लेकर लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं, क्योंकि यह मुद्दा लंबे समय से अटका हुआ है। मंत्रालय पहले भी झरिया मास्टर प्लान और पुनर्वास कार्यों की समीक्षा करता रहा है।झरिया का मुद्दा सिर्फ कोयला उत्पादन का नहीं, बल्कि वहां रहने वाले हजारों परिवारों की सुरक्षा और पुनर्वास का भी है। भूमिगत आग, जमीन धंसने और असुरक्षित बस्तियों के कारण लंबे समय से लोगों के पुनर्वास की मांग उठती रही है। ऐसे में मंत्री का यह दौरा इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे पुनर्वास योजना को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
ईसीएल और बीसीसीएल के कामकाज की समीक्षा
दौरे के दौरान कोयला उत्पादन, डिस्पैच, सुरक्षा व्यवस्था और चल रही परियोजनाओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों के साथ बैठक में उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ सुरक्षा मानकों और श्रमिक सुविधाओं पर भी चर्चा हुई। कोयला मंत्रालय की प्राथमिकता साफ है कि उत्पादन के साथ सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारियों पर भी बराबर ध्यान दिया जाए। झरिया क्षेत्र के लोग लंबे समय से सुरक्षित आवास, बेहतर सड़क, स्कूल, अस्पताल और रोजगार जैसी सुविधाओं की मांग करते रहे हैं। कई परिवार अब भी जोखिम वाले इलाकों में रहने को मजबूर हैं। मंत्री के दौरे के बाद लोगों को उम्मीद है कि अब सिर्फ बैठकों तक बात सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जमीन पर काम तेज होगा।इस दौरे को सिर्फ औपचारिक निरीक्षण नहीं माना जा रहा। यह कोयला क्षेत्र के लिए एक संदेश भी है कि केंद्र सरकार उत्पादन के साथ-साथ पुनर्वास और मानव सुरक्षा के मुद्दों को भी गंभीरता से देख रही है।
Also Read : दुमका में नाबालिग से गैंगरे’प, तीन आरोपियों को पुलिस ने दबोचा


