Ranchi : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने अपने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट डालते हुए कहा कि राजधानी में आदिवासी जमीन पर खुलेआम CNT एक्ट की अवहेलना हो रही है। उनके मुताबिक, अदालत के स्पष्ट आदेशों के बावजूद प्रशासन इस मामले में दखल नहीं दे पा रहा है।
राजधानी रांची में खुलेआम CNT एक्ट की अवहेलना हो रही है। न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद प्रशासन दखल-दिहानी कराने में विफल साबित हो रहा है। अरगोड़ा अंचल में महतो उरांव की 1.19 एकड़ जमीन को चार दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उन्हें दखल नहीं मिल सका है, जो अत्यंत चिंताजनक…
— Babulal Marandi (@yourBabulal) February 17, 2026
चार दशक बाद भी नहीं मिली जमीन
मरांडी ने विशेष रूप से अरगोड़ा अंचल के महतो उरांव की 1.19 एकड़ जमीन का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि चार दशक से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद जमीन के मालिक को अभी तक उसका हक नहीं मिला है। इसे उन्होंने “अत्यंत चिंताजनक” बताया।
नेताओं और बिल्डरों की मिलीभगत?
बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि रांची में आदिवासी जमीन पर सीएम हेमंत सोरेन, सत्ताधारी नेताओं, बिल्डरों और प्रभावशाली लोगों द्वारा कब्जा किया जा रहा है। इन कब्जों पर अपार्टमेंट और बैंक्वेट हॉल जैसी निर्माण गतिविधियां भी चल रही हैं। मरांडी ने कहा कि हेमंत सोरेन जी ‘जल, जंगल, जमीन’ का नारा देते हैं, लेकिन रांची, दुमका, रामगढ़, धनबाद और जमशेदपुर तक आदिवासियों की जमीन पर कब्जा बढ़ता जा रहा है।
शिबू सोरेन के दौर की याद
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि आदिवासी जमीन पर कब्जे की प्रवृत्ति शिबू सोरेन के समय शुरू हुई थी, और अब वही प्रवृत्ति व्यापक रूप लेती दिखाई दे रही है। चाहे वह आदिवासी जमीन हो, आवास बोर्ड की जमीन हो या गैर-मजरुआ जमीन – हर जगह अवैध कब्ज़े हो रहे हैं।
मरांडी की मांग : सख्त कार्रवाई हो
बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार से मांग की है कि वे इस गंभीर मामले पर तुरंत संज्ञान लें और महतो उरांव को उनकी जमीन पर विधिसम्मत अधिकार दिलाएं। साथ ही उन्होंने कहा कि एक उच्चस्तरीय समिति बनाई जाए, जो रांची और राज्य के अन्य हिस्सों में आदिवासियों की जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।
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