Gumla : वित्तीय वर्ष खत्म होने से ठीक पहले गुमला के शिक्षा विभाग में सब्सिडी के भुगतान को लेकर बड़ी गड़बड़ी की आशंका सामने आ रही है। आरोप है कि बिना काम पूरा हुए और बिना सही जांच के ही स्कूलों को लाखों रुपये जारी कर दिए गए। इससे पूरे सिस्टम की देनदारी और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो गए हैं।
अंतिम सप्ताह में बढ़ी आपाधापी
बताया जा रहा है कि वित्तीय वर्ष के आखिरी दिनों में विभाग में तेजी से भुगतान करने की होड़ लग गई। अधिकारियों की कमी और देरी से फाइलें चलने की वजह से अचानक बड़े पैमाने पर पैसे जारी किए जा रहे हैं। कई मामलों में काम पूरा हुए बिना ही भुगतान कर दिया गया।
पौधरोपण के नाम पर फिर खर्च, उठे सवाल
जानकारी के मुताबिक कुछ महीने पहले ही वन विभाग ने स्कूलों को मुफ्त में पौधे दिए थे और स्कूलों ने एक लाख से ज्यादा पौधे लगाने का दावा भी किया था। इसके बावजूद अब फिर से पौधरोपण और पर्यावरण गतिविधियों के नाम पर 70 लाख रुपये से ज्यादा की राशि जारी कर दी गई।
स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि जब पहले ही पौधे मिल चुके थे, तो दोबारा इतनी बड़ी रकम खर्च करने की जरूरत क्यों पड़ी।
सिर्फ बिल, जमीन पर काम कम
चर्चा यह भी है कि कई सप्लायर स्कूलों में सिर्फ बिल और वाउचर दे रहे हैं, जबकि असल काम बहुत कम हुआ है। इससे पूरे मामले में गड़बड़ी की आशंका और गहरी हो गई है।
बच्चों को नहीं मिला यूनिफॉर्म, फिर भी भुगतान
सबसे गंभीर आरोप ड्रेस वितरण को लेकर है। क्लास 1 और 2 के 10 हजार से ज्यादा बच्चों के बैंक खाते तक विभाग अभी तक नहीं खोज पाया है, लेकिन ड्रेस खरीद के नाम पर 60 लाख रुपये से ज्यादा की राशि जारी कर दी गई।
कई स्कूलों पर आरोप है कि बच्चों को ड्रेस, जूता, मोजा और स्वेटर दिए बिना ही भुगतान के लिए बिल लगा दिया गया।
अन्य मदों में भी भारी राशि जारी
इसके अलावा स्कूल ग्रांट के लिए 50 लाख रुपये से ज्यादा, प्रबंधन समिति प्रशिक्षण के लिए 30 लाख रुपये से ज्यादा और आत्मरक्षा प्रशिक्षण व आईसीटी जैसे मदों में भी बड़ी रकम जारी की गई है। बिना सही जांच के इतने बड़े भुगतान ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
अधिकारियों की कमी बनी बड़ी वजह
नियम के मुताबिक काम पूरा होने और जांच के बाद ही भुगतान होना चाहिए, लेकिन जिले में अधिकारियों की भारी कमी है। 12 प्रखंडों के लिए सिर्फ दो शिक्षा अधिकारी तैनात हैं, जिससे सही तरीके से जांच नहीं हो पा रही है।
विभाग का पक्ष भी आया सामने
इस मामले पर एडीपीओ ज्योति ने कहा कि अधिकारियों की कमी और नई तकनीकी व्यवस्था लागू होने के कारण दिक्कतें आई हैं। तकनीकी वजहों से काम प्रभावित हुआ है और इसी कारण भुगतान प्रक्रिया में जल्दबाजी हुई।
जांच की मांग तेज
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर जांच की मांग तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो बच्चों के हक और सरकारी पैसों का बड़ा नुकसान हो सकता है।


