पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज मामले में CBI की क्लोजर रिपोर्ट को मंजूर कर लिया है. इसके साथ ही इस मामले में उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही भी खत्म हो गई है.
यह फैसला ऐसे समय आया है जब मनमोहन सिंह अब इस दुनिया में नहीं हैं. उनका निधन 26 दिसंबर 2024 को हुआ था. उनके निधन के करीब डेढ़ साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए CBI की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया. कोर्ट ने 2015 में विशेष CBI अदालत की ओर से मनमोहन सिंह को जारी किए गए समन को भी रद्द कर दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि CBI की जांच के बाद दाखिल की गई क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने और आगे की आपराधिक कार्यवाही शुरू करने के लिए विशेष अदालत के पास पर्याप्त ठोस आधार नहीं था.
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Talabira-II कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़ा था मामला
यह पूरा मामला ओडिशा के Talabira-II कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा हुआ था. साल 2005 में हुए इस आवंटन को लेकर CBI ने जांच शुरू की थी. जांच के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठे थे, क्योंकि उस समय कुछ अवधि के लिए कोयला मंत्रालय का प्रभार भी उनके पास था.
CBI ने जांच पूरी करने के बाद मनमोहन सिंह के खिलाफ दो क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थीं. एजेंसी का कहना था कि उनके खिलाफ आपराधिक साजिश या भ्रष्टाचार के आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले हैं.
हालांकि, विशेष CBI अदालत ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया था. मार्च 2015 में अदालत ने मनमोहन सिंह समेत कुछ अन्य लोगों को समन जारी कर दिया था. इसके बाद मनमोहन सिंह ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि विशेष अदालत के पास CBI की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने और मनमोहन सिंह के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही आगे बढ़ाने का पर्याप्त आधार नहीं था.
शीर्ष अदालत ने 2015 में जारी समन के आदेश को रद्द कर दिया और CBI की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया. इसके साथ ही मनमोहन सिंह के खिलाफ इस मामले में चल रही आपराधिक कार्यवाही पर भी पूर्ण विराम लग गया.
यह मामला उस बड़े कोयला आवंटन विवाद का हिस्सा था, जिसे आमतौर पर ‘कोलगेट’ के नाम से जाना जाता है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सिर्फ Talabira-II कोयला ब्लॉक से जुड़े इस विशेष मामले पर है. इसका मतलब यह नहीं है कि कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े बाकी सभी मामलों पर भी इसका असर पड़ेगा.
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2015 से चल रही थी कानूनी लड़ाई
मनमोहन सिंह के खिलाफ इस मामले में 2015 में समन जारी होने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. सुप्रीम कोर्ट ने उसी साल उनके खिलाफ आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी. इसके बाद यह मामला लंबे समय तक शीर्ष अदालत में चलता रहा.
मनमोहन सिंह का निधन 26 दिसंबर 2024 को हुआ. हालांकि, उनके निधन के बाद भी इस मामले से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया और 2015 में जारी समन के आदेश की वैधता का सवाल सुप्रीम कोर्ट के सामने बना रहा. अब शीर्ष अदालत के फैसले के बाद इस मामले में उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पूरी तरह खत्म हो गई है.
CBI की क्लोजर रिपोर्ट को मंजूरी मिलने और 2015 के समन आदेश को रद्द किए जाने के साथ ही करीब एक दशक से चली आ रही इस कानूनी लड़ाई का अंत हो गया है. मनमोहन सिंह के निधन के करीब डेढ़ साल बाद आया यह फैसला उनके खिलाफ इस खास मामले में बड़ी कानूनी राहत के तौर पर देखा जा रहा है.
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