रांची: झारखंड जनाधिकार महासभा ने 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर राज्य सरकार से आंदोलनरत छात्रों के साथ तत्काल वार्ता करने की मांग की है. महासभा ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया को लेकर सामने आए आरोप गंभीर हैं और सरकार को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ JPSC की कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए.
14वीं JPSC परीक्षा को लेकर उठाए सवाल
महासभा ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दावा किया कि 14वीं JPSC परीक्षा के परिणाम और चयन प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं. संगठन ने 2 जुलाई को जारी परिणाम में कथित तौर पर केवल 48 प्रश्नों के उत्तर देने वाले अभ्यर्थी के चयन और 500 से अधिक OMR शीट में संभावित हेरफेर के आरोपों की जांच की मांग की है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
संगठन ने कट-ऑफ अंक और OMR शीट सार्वजनिक नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए. साथ ही, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से करीब 418 अभ्यर्थियों के चयन को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की है.
महासभा ने कहा कि 21 जुलाई को JPSC कार्यालय और निजी कंपनी TDPL से जुड़े परिसरों पर CID/पुलिस की छापेमारी के बाद आयोग के अध्यक्ष एल. खियांगते के इस्तीफे और मुख्य परीक्षा स्थगित किए जाने से परीक्षा प्रक्रिया को लेकर छात्रों की चिंताएं और बढ़ी हैं. संगठन ने परीक्षा से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की जांच पूरी करने की मांग की है.
प्रेस विज्ञप्ति में महासभा ने दावा किया कि मामले में JPSC अधिकारी श्वेता कुमारी गुप्ता, TDPL के मालिक रामवीर सिंह और कथित बिचौलिए अभय कुमार तिवारी समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है. संगठन ने कहा कि जांच में कथित तौर पर होटलों में बैठकों और आर्थिक लेन-देन से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है. महासभा ने यह सवाल भी उठाया कि कथित तौर पर ब्लैकलिस्टेड कंपनी को परीक्षा संबंधी काम कैसे दिया गया.
छात्रों के भविष्य और पारदर्शी नियोजन नीति की मांग
महासभा के मुताबिक, विवाद के चलते 14वीं JPSC मुख्य परीक्षा के अलावा अन्य परीक्षाओं के स्थगित होने से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है. संगठन ने सरकार से छात्रों की मांगों पर तत्काल कार्रवाई करने और परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की अपील की.
महासभा ने परीक्षा में कथित धांधली, पेपर लीक और JPSC-JSSC में भ्रष्टाचार के आरोपों पर जवाबदेही तय करने की मांग की है. इसके अलावा राज्य में स्पष्ट स्थानीय और नियोजन नीति लागू करने, वर्ष 2000 से कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मियों के स्थायीकरण और आरक्षण नीति के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की गई है.
संगठन ने ई-कल्याण छात्रवृत्ति से जुड़ी समस्याओं का समाधान कर पात्र छात्रों को जल्द छात्रवृत्ति देने और स्कूल-कॉलेजों में लागू क्लस्टर सिस्टम को समाप्त करने की भी मांग की है.
महासभा ने कहा कि JPSC जैसी संवैधानिक संस्था की परीक्षा प्रक्रिया में अभ्यर्थियों का भरोसा बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है. संगठन ने राज्य सरकार से आंदोलनरत छात्रों के साथ तत्काल वार्ता कर उनकी मांगों पर कार्रवाई करने की अपील की है.

