Ranchi : झारखंड के ग्रामीण कार्य विभाग में टेंडर के बदले कमीशन लेने के बड़े खेल का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। ED ने इस मामले में पांचवीं सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल करते हुए 14 और इंजीनियरों व अधिकारियों को आरोपी बनाया है। इसके साथ ही केस में कुल आरोपियों की संख्या 36 हो गई है। ED ने 17 मार्च 2026 को रांची स्थित PMLA की विशेष अदालत में यह चार्जशीट दाखिल की। जांच एजेंसी का दावा है कि विभाग के भीतर एक संगठित नेटवर्क बनाकर टेंडर के एवज में तय कमीशन लिया जा रहा था।
ऐसे चलता था कमीशन का पूरा खेल
जांच में सामने आया है कि ठेकेदारों से टेंडर दिलाने के बदले कुल राशि का करीब 3% कमीशन लिया जाता था।
इस पैसे का बंटवारा भी पहले से तय था—
- करीब 1.35% हिस्सा तत्कालीन मंत्री तक पहुंचता था
- 0.65% से 1% तक विभागीय सचिव को जाता था
- बाकी रकम चीफ इंजीनियर और अधीनस्थ इंजीनियरों में बांटी जाती थी
ED के मुताबिक, लगभग 3048 करोड़ रुपए के टेंडर में यह खेल चला, जिससे 90 करोड़ रुपए से ज्यादा की अवैध कमाई हुई।
इन अधिकारियों की भूमिका आई सामने
नए आरोपियों में विभाग के कई बड़े और रिटायर्ड अधिकारी शामिल हैं। इनमें चीफ इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और एक पूर्व इंजीनियर-इन-चीफ स्तर के अधिकारी भी हैं। जांच में पाया गया है कि ये अधिकारी कमीशन की वसूली, उसे इकट्ठा करने और ऊपर तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।
2019 के केस से शुरू हुई जांच
यह मामला 2019 में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), जमशेदपुर में दर्ज एक FIR से शुरू हुआ था। इसके बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की और धीरे-धीरे पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।

अब तक की कार्रवाई एक नजर में
- 52 जगहों पर छापेमारी (झारखंड, बिहार और दिल्ली)
- 9 लोगों की गिरफ्तारी
- 44 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच
- करीब 38 करोड़ रुपए कैश बरामद
- 8 लग्जरी गाड़ियां जब्त
गिरफ्तार आरोपियों में पूर्व मंत्री, उनका निजी सचिव और सहयोगी शामिल हैं, जो फिलहाल जेल में हैं।
पहले भी दाखिल हो चुकी हैं कई चार्जशीट
इससे पहले ED इस मामले में एक मुख्य और चार सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। अदालत इन पर संज्ञान ले चुकी है। अब पांचवीं चार्जशीट में नए नाम जुड़ने से केस और मजबूत माना जा रहा है।
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