किसलय शानू
जेपीएसी घोटाला में सीआइडी की चार्जशीट में खुलासा हुआ कि जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल ख्यांगते को हवाला के जरिये भी पैसा पहुंचाये जाते थे. हवाला के जरिये पैसों का लेन- देन के लिए 10 रुपये का नोट को कोडवर्ड के रूप में इस्तेमाल किया जाता था.
सीआइडी की चार्जशीट के अनुसार बिनसय एजेंसी के निदेशक अरूण कुमार की मुलाकात एल ख्यांगते से धर्मेंद्र के माध्यम से जेपीएससी अध्यक्ष के आवास में हुई थी. जिसके बाद जेट परीक्षा संचालित करने का काम मिला था. काम के एवज में अध्यक्ष के द्वारा दो करोड़ रुपये और परीक्षा आयोजित करने से संबंधित बिल का 10 प्रतिशत कमीशन पर डील तय हुई थी.
बैठक होने के बाद धमेंद्र ने अरूण से कहा कि काम मिलने पर अध्यक्ष को तत्काल एक करोड़ रुपये नकद और बिल का 10 प्रतिशत देना होगा. इसके अलावा मुझे एक चार पहिया वाहन चाहिए. इसी शर्त पर डील तय हुई थी. इस बात की पुष्टि अनुसंधान में आये साक्ष्यों से भी होती है. सीआइडी की चार्जशीट के अनुसार अनुसंधान में आये तथ्यों से इस बात की भी पुष्टि होती है कि जेपीएससी की सदस्य अजीता भट्टाचार्य के पीए ने पतंजलि आइएएस के रवि के माध्यम से बिनसय (जेएसएससी से ब्लैकलिस्टेड) अरूण कुमार को धर्मेंद्र के जरिये अध्यक्ष से सेटिंग करवाकर जेपीएससी का काम दिलवाया था.
25 दिसंबर 2025 को वह अरूण कुमार व सानंद प्रकाश के साथ आइजोल (मिजोरम) गया था और अध्यक्ष के घर पर 2.5 लाख नकद दिये थे.संबंधित एयरलाइन से उक्त यात्रा के संबंध में प्राप्त जानकारी और मोबाइल नंबर के लोकेशन से भी इस बात की पुष्टि हुई है. अरूण कुमार के मोबाइल नंबर का लोकेशन उक्त तिथि को लेंगपुई एयरपोर्ट और आइजोल है.
विगत दो वर्ष में अरूण कुमार ने ब्रज राम से 408, जेपीएससी की परीक्षा उप नियंत्रक श्वेता गुप्ता से पांच और धर्मेंद्र से एक बार बात की है. ब्रज राम के मोबाइल में मिजोरम यात्रा का टिकट और अरूण- सानंद की वाट्सएप चैट से हवाला से धरनाशि बिनसय के दिल्ली कार्यालय के पता से होने की बात सामने आयी है. हवाला के जरिये पैसे पहुंचाने के लिए 10 रुपये का नोट कोडवर्ड के रूप में इश्तेमाल किया जाता था.
चार्जशीट से पहले क्या-क्या हुआ
झारखंड गठन के बाद से जेपीएससी की लगभग हर बड़ी सिविल सेवा परीक्षा किसी न किसी विवाद में रही है. कभी रिजल्ट संशोधित हुआ, कभी इंटरव्यू के अंकों पर सवाल उठे, कभी आरक्षण और आंसर-की को लेकर मामला अदालत पहुंचा. पहली और दूसरी जेपीएससी परीक्षा की कथित गड़बड़ियों की सीबीआइ जांच आज भी जारी है.
एल ख्यांगते 1988 बैच के आइएएस अधिकारी हैं. मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें फरवरी 2025 में जेपीएससी का अध्यक्ष बनाया गया था. परीक्षा संचालन का जिम्मा टीडीपीएल (टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग) एजेंसी के पास था, जिसे 2024 में तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था. फिर भी वह कम से कम 2025 से जेपीएससी की परीक्षाएं शुरू से अंत तक करा रही थी. जांच में यह भी सामने आया कि एजेंसी ने टेंडर में बोली नहीं लगायी थी, उसे नामित किया गया था.
14वीं सिविल सेवा परीक्षा से भड़का मामला
- 5 जुलाई 2026 को 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट आया. 103 पदों के लिए 2,204 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित हुए.
- कट-ऑफ सार्वजनिक नहीं किया गया और अभ्यर्थियों का आरोप था कि मेरिट सूची पर किसी सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं थे. 14 जुलाई को बड़ी संख्या में अभ्यर्थी रांची में सड़क पर उतरे.
- इसी बीच सोशल मीडिया पर कुछ ओएमआर शीट वायरल हुईं. दावा था कि एक अभ्यर्थी ने पेपर-1 में सिर्फ करीब 48 प्रश्न हल किये, फिर भी वह सफल घोषित हुआ. इन शीटों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हुई है.
सीआइडी जांच और गिरफ्तारियां
- सरकार ने जांच सीआइडी को सौंपी. सीआइडी ने कांड संख्या 16/2026 दर्ज कर एसआइटी बनायी.
- 22 जुलाई को जेपीएससी ने मुख्य परीक्षा-2025 समेत नौ भर्ती परीक्षाएं अगली सूचना तक स्थगित कर दीं. उसी दिन अध्यक्ष एल ख्यांगते ने इस्तीफा दे दिया. उनका कहना था कि निष्पक्ष जांच के लिए उन्होंने स्वेच्छा से पद छोड़ा. सीआइडी ने उनके आवास समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की.
- पहले चरण में पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, मोहम्मद उस्मान, मोहम्मद एबाद और अभय कुमार तिवारी गिरफ्तार हुए. दूसरे चरण में हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह और संजय कुमार पकड़े गये.
- अभय तिवारी गोड्डा के पोरैयाहाट में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी हैं और पहले टीडीपीएल में मार्केटिंग मैनेजर थे. सीआइडी उन्हें कथित सूत्रधार बता रही है. एफआइआर के अनुसार गिरोह ने प्रारंभिक परीक्षा के लिए 5 लाख, अंतिम चयन के लिए 25 लाख और मुख्य परीक्षा के लिए कम से कम 10 लाख रुपये अग्रिम मांगे थे.
- सीआइडी ने अदालत को बताया कि 26 जुलाई के बयान में तिवारी ने 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा के इंटरव्यू में कुछ अभ्यर्थियों की सीटिंग सेट कराने की बात कही और इसके बदले 15 लाख रुपये प्रति अभ्यर्थी लिये जाने का जिक्र किया. यह सीआइडी का अदालत में दिया गया बयान है, अदालत का निष्कर्ष नहीं.
चार्जशीट की कड़ियां
- अजीता भट्टाचार्य और उनके पीए: अजीता भट्टाचार्य जेएमएम नेता सुप्रियो भट्टाचार्य की पत्नी हैं. सीआइडी का समन मिलने के बाद उन्होंने आयोग से इस्तीफा दे दिया. सीआइडी ने अदालत को बताया कि उनके पीए ने एक अभ्यर्थी से 80 अंक बढ़वाने के नाम पर 5 लाख रुपये लिये.
- बिनसय और अरूण कुमार: सीआइडी के अनुसार पहले से ब्लैकलिस्ट रही इस कंपनी को जेपीएससी का काम दिलाने में पीए की भूमिका थी. वह अरूण कुमार के साथ आइजोल गया था.
- जेएसएससी जेई पेपर लीक से रिश्ता: अरूण कुमार को एसआइटी ने मुंबई से गिरफ्तार किया. वह जेएसएससी जूनियर इंजीनियर (डिप्लोमा) परीक्षा 2022 के कथित पेपर लीक का आरोपी है. दिल्ली के मुनिरका में उसका किराये का दफ्तर बंद मिला और मकान मालिक के अनुसार करीब एक साल से किराया नहीं दिया गया था.
29 जुलाई को हजारों छात्रों ने रांची में मार्च निकाला. आंदोलन की अगुवाई जॉइंट स्टूडेंट्स फ्रंट कर रहा है और देवेंद्र नाथ महतो 3 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं. छात्र 14वीं प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने, टीडीपीएल से हुई सभी परीक्षाओं की समीक्षा, भर्ती व्यवस्था में सुधार और सीबीआइ जांच की मांग कर रहे हैं. भाजपा ने भी सीबीआइ जांच की मांग की और सीआइडी जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठाये. सत्ता पक्ष का कहना है कि गड़बड़ी सामने आते ही जांच शुरू हुई और अध्यक्ष ने इस्तीफा दिया.
चार्जशीट से ठीक पहले की स्थिति
- अगस्त के दूसरे सप्ताह में आयोग के तीन सदस्यों (अजीता भट्टाचार्य, अनिमा हंसदा, जमाल अहमद) ने पूछताछ से पहले इस्तीफा दे दिया.
- सीआइडी ने 28 जुलाई से चार बार पूछताछ करने के बाद 10 अगस्त को ख्यांगते को गिरफ्तार किया. 17 अगस्त तक सीआइडी 20 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी थी.
- सरकार ने 44 परीक्षाएं रद्द करने की सूची जारी की, जिनमें से 22 के रद्द होने पर बाद में हाइकोर्ट ने रोक लगा दी. ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है.
- 5 सितंबर को विशेष अदालत ने ख्यांगते की जमानत याचिका खारिज कर दी. उनके वकीलों ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि सीआइडी के पास उनकी संलिप्तता का सीधा साक्ष्य नहीं है.


