किसलय शानू
जेपीएससी परीक्षा घोटाले के मास्टरमाइंड अभय तिवारी ने जेपीएससी परीक्षा पास कराकर अपने आय से अधिक धन एकत्र था. इस बात का खुलासा सीआईडी ने जांच के बाद अभय तिवारी के खिलाफ न्यायालय में समर्पित चार्जशीट में किया है. पांचवी कड़ी में आज हम अभय के चार्चशीट की पूरी जानकारी दे रहे हैं.
सीआईडी की चार्जशीट के अनुसार अभय तिवारी के पैन से जुड़े खातों में कुल करीब 3.89 करोड़ से अधिक जमा होने की पुष्टि हुई है. इसमें ESAF खाता (2024-26): लगभग 1.21 करोड़, एसबीआई एकाउंट में साल 2019 से लेकर 23 के बीच 1.21 करोड़ से अधिक, दूसरे सीबीआई खाता में साल 2026 में 4.66 लाख से अधिक, पार्टनर उमेश के साथ सागर पैलेस के आईडीएफसी खाता में 2022-2023 में 33.10 लाख से अधिक तथा प्रकाश रेसिडेंसी के एकाउंट में 2021-2024 में 94.49 लाख से अधिक जमा हुए थे.
सीआईडी की चार्जशीट के अनुसार यह एक सरकारी कर्मी की ज्ञात आय की तुलना में बहुत अधिक है.
चार्जशीट के अनुसार अभय तिवारी के इसीएफ खाता में 2024: 19.96 लाख, वर्ष 2025 में 81.49 लाख से अधिक तथा साल 2026 में 19 जुलाई तक 19.73 लाख से अधिक जमा हुए थे. पैसे मुख्य रूप से जमा एसीएफ, एफआरओ एवं 14 में जेपीएससी पीटी के समय हुए थे.
सीआईडी की चार्जशीट के अनुसार यह परीक्षाओं से जुड़ी अवैध आय का संकेत है. चार्ज शीट के अनुसार अभय एजेंट लाल यादव से तीन बार में 1,40,000 रुपए जमा कर आए थे तथा साले की फार्म सान्वी सप्लाई एंड सर्विस से सितंबर से नवंबर 2025 के बीच नियमित राशि आई है.
अभय ने अपने अकाउंट से एजेंट आदित्य पांडे को 1,00,000 भेजा था. इसके साथी रवि शंकर कुमार के साथ भी लेनदेन हुआ था. उमेश कुमार और बुद्धेश्वर भगत के जरिए 11 अभ्यर्थियों से मिली करीब 1 करोड़ की रकम अभय के कहने पर सौरभ पाण्डेय को दी गई. यही 11 अभ्यर्थी बाद में पीटी में सफल हुए. सीजीएल मामले में हर अभ्यर्थी से कथित तौर पर 12 लाख लिए गए.
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टीडीपीएल से था अभय तिवारी का पहले से गठजोड़
सीआईडी के अनुसार, अभय को TDPL एजेंसी ने “मार्केटिंग मैनेजर” का परिचय पत्र जारी किया था. यह पत्र TDPL के लालपुर स्थित आवास-सह-कार्यालय से जब्त सूची में बरामद हुआ. लखनऊ स्थित पंजीकृत कार्यालय से उसका मूल ऑथराइजेशन लेटर भी मिला है. आरोप है कि वह TDPL का स्थानीय लिंक था और अभ्यर्थियों व एजेंटों के बीच कड़ी का काम करता था.
जांच में यह भी सामने आया है कि रांची में TDPL के आवास-सह-कार्यालय का किराया अभय के ESAF खाते से भुगतान हुआ. मई से नवंबर 2025 के बीच कुल 2.20 लाख चुकाए गए.
TDPL के कर्मचारियों के हवाई टिकट अभय के ई-मेल और मोबाइल नंबर से बुक हुए.
TDPL निदेशकों के रांची में ठहरने का होटल भुगतान भी उसी ने किया.
TDPL कर्मियों मो. उस्मान, प्रदीप कुमार सिंह और संजय कुमार को उसके खाते से रकम भेजी गई. आरोप पत्र के अनुसार, वह जेपीएससी के कई पदाधिकारियों के साथ-साथ TDPL के कर्मियों से जुड़ा रहा. इसे “हितों के टकराव” का मामला बताया गया है.
अभय तिवारी ने अपने निजी सहायक को भी पास करवाया जेपीएससी
जांच में बताया गया कि अभय के निजी सहायक अरविंद कुमार ने 14वीं जेपीएससी पीटी में पेपर-1 में 85 और पेपर-2 में 87 प्रश्न हल कर 292 अंक पाए. मुख्य परीक्षा में उसने सिर्फ 12 और 35 प्रश्न किए. सीसीटीवी फुटेज में कई अभ्यर्थी OMR भरते नहीं दिखे, फिर भी उनकी OMR में 91-92 उत्तर पाए गए.
ओम प्रकाश राणा और उससे जुड़े 11 अभ्यर्थियों के मामले में ऐसा हुआ. 14वीं जेपीएससी पीटी के 13 सफल अभ्यर्थियों की मोबाइल सीडीआर में अभियुक्त के नंबरों से संपर्क की पुष्टि हुई है.
पत्नी, साले और परिजनों का चयन
सीआईडी की चार्जशीट के अनुसार अभय खुद PGTTCE-2023, JSSC CGL-2023, ACF, FRO और FSO परीक्षाओं में सफल हुआ. जेएसएससी सीजीएल में उसे रैंक 48 मिली, और उसकी पत्नी, भाई और साले का भी चयन हुआ. जांच में कहा गया कि वह जिन परीक्षाओं का संचालन TDPL कर रही थी, उन्हीं में “मार्केटिंग मैनेजर” होते हुए खुद अभ्यर्थी बना रहा.
सीजीएल मामले में उसने बताया कि WEBEL Technology की आउटसोर्स एजेंसी ICN India के सहयोग से उसे और 15 अन्य अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्नों के उत्तर मिले. हर अभ्यर्थी से कथित तौर पर 12 लाख लिए गए. इसकी पुष्टि संबंधित केस (01/2025) के अनुसंधान में भी हुई.
आरोप पत्र में अरविंद कुमार, उमेश कुमार, बुद्धेश्वर भगत, लालू यादव और आदित्य पांडेय जैसे दलालों का जिक्र है.
हजारीबाग में लालू कुमार यादव के घर की तलाशी में अभय के कोटक महिंद्रा खाते का 25 लाख का चेक, OMR और TDPL लिखे कार्ड के टुकड़े मिले. नामकुम में आदित्य पांडेय के घर से FRO/ACF मुख्य परीक्षा की मॉडल आंसर सहित प्रश्न-पुस्तिका, ACF मेन का प्रवेश पत्र और ESAF खाते की चेकबुक बरामद हुई. अभय ने आदित्य को 1 लाख भेजे थे.
रवि मास्टर के जरिए जेपीएससी से जुड़े धर्मेंद्र कुमार को अभय ने 50,000 दिए. उसकी पत्नी किरण देवी के नाम खरीदी गई रॉयल एनफील्ड हंटर 350 बाइक के भुगतान में भी इसी रकम का इस्तेमाल हुआ. धर्मेंद्र का TDPL से जुड़े नंबर से जनवरी 2026 में संपर्क पाया गया, जो जेपीएससी की 14वीं परीक्षा का “एंड-टू-एंड” काम TDPL को मिलने से तीन दिन पहले की बात है. आरोप पत्र के अनुसार, अभय ने साक्ष्य नष्ट करने की नीयत से घटना के समय अपना मोबाइल तोड़कर फेंक दिया था.


