Assam : झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) इस बार असम विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत से उतरने की तैयारी कर रही है। पार्टी का कहना है कि वह झारखंड में महागठबंधन के समीकरण से अलग होकर भी असम में अपने दम पर चुनाव लड़ सकती है। JMM के केंद्रीय महासचिव और प्रवक्ता मनोज पांडे ने साफ कहा है कि सीएम हेमंत सोरेन के हालिया असम दौरे में मिला जनसमर्थन इस बात का संकेत है कि वहां पार्टी का आधार मजबूत है।
25-30 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी
मनोज पांडेय के मुताबिक, पार्टी असम में करीब 25 से 30 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की रणनीति बना रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अभी सीटों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और बातचीत अंतिम चरण में है।
कांग्रेस के साथ गठबंधन पर बातचीत जारी
JMM ने संकेत दिया है कि झारखंड में उसके सहयोगी दल कांग्रेस के साथ असम चुनाव को लेकर सीट शेयरिंग पर बातचीत चल रही है। अगर समझौता हो जाता है, तो कुछ सीटों पर समझौता भी किया जा सकता है ताकि भाजपा को सत्ता से बाहर किया जा सके। वहीं कांग्रेस का कहना है कि असम की जमीनी स्थिति को समझकर ही सीटों की मांग होनी चाहिए। कांग्रेस का मानना है कि वह अकेले भी भाजपा को चुनौती देने में सक्षम है, लेकिन सहयोगी दलों के साथ मिलकर लड़ने की इच्छा भी जताई गई है।
प्लान B भी तैयार
JMM ने यह भी साफ किया है कि अगर कांग्रेस के साथ बात नहीं बनती है, तो पार्टी समान विचारधारा वाली अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन कर सकती है। पार्टी का मुख्य लक्ष्य भाजपा को सत्ता में आने से रोकना है।
जनजातीय वोट बैंक पर नजर
असम में JMM खास तौर पर आदिवासी समुदाय और टी-ट्राइब वोट बैंक को साधने की कोशिश में है। पार्टी का मानना है कि इन समुदायों के अधिकारों की लड़ाई वह बेहतर तरीके से लड़ सकती है। इसके साथ ही दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के कुछ हिस्सों को भी अपने पक्ष में करने की रणनीति है।
सियासी असर और आगे की स्थिति
अगर JMM महागठबंधन से अलग होकर चुनाव लड़ती है, तो इसका असर कांग्रेस के वोट बैंक पर पड़ सकता है। फिलहाल दोनों दलों के बीच बातचीत जारी है और उम्मीद है कि सीट शेयरिंग को लेकर जल्द कोई फॉर्मूला सामने आ सकता है।
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