जोहार लाइव ब्यूरो
झारखंड में निचली अदालतों में जजों की कमी पहले से ही बड़ी चुनौती रही है. केंद्र सरकार के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि राज्य में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के आधे से अधिक पद खाली थे. अब झारखंड न्यायिक सेवा परीक्षा रद्द होने के बाद नई नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. यह संकट सिर्फ झारखंड का नहीं है. देशभर की जिला और अधीनस्थ अदालतों में भी हजारों न्यायिक पद खाली हैं, जबकि हाईकोर्टों में भी 30 प्रतिशत से अधिक पद रिक्त हैं.
झारखंड में 707 पदों में 211 थे खाली
केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय की ओर से 6 फरवरी 2026 को लोकसभा में दिए गए लिखित जवाब में बताया गया कि 31 मार्च 2024 तक झारखंड की जिला और अधीनस्थ अदालतों में 707 न्यायिक अधिकारियों के स्वीकृत पदों के मुकाबले 496 अधिकारी कार्यरत थे, जबकि 211 पद रिक्त थे. यानी करीब 29.8 प्रतिशत पद खाली थे.
सबसे गंभीर स्थिति सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की थी. 311 स्वीकृत पदों में केवल 139 अधिकारी कार्यरत थे और 172 पद खाली थे. यानी इस संवर्ग के करीब 55.3 प्रतिशत पद रिक्त थे.
संवर्ग| स्वीकृत पद| कार्यरत| रिक्त पद
जिला जज| 240| 202| 38
सिविल जज, जूनियर डिवीजन| 311| 139| 172
सिविल जज, सीनियर डिवीजन| 156| 155| 1
कुल| 707| 496| 211
सरकार ने इसी जवाब में यह भी स्पष्ट किया कि जिलों में 25 प्रतिशत से अधिक रिक्तियों की संख्या, रिक्त पद कितने समय से खाली हैं और अधिक रिक्ति वाले जिलों में प्रति न्यायिक अधिकारी लंबित मामलों का आंकड़ा केंद्र सरकार के स्तर पर केंद्रीय रूप से उपलब्ध नहीं है. न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति जिला और अधीनस्थ अदालतों के मामले में संबंधित हाईकोर्ट और राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती है.

देशभर में 7,310 न्यायिक पद खाली
देश की जिला एवं अधीनस्थ अदालतों की स्थिति के ताजा उपलब्ध आंकड़े 23 जुलाई 2026 को राज्यसभा में केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के दिए जवाब से सामने आए हैं. जवाब के अनुसार, देशभर में 30,868 स्वीकृत न्यायिक पदों में 23,558 न्यायिक अधिकारी कार्यरत थे, जबकि 7,310 पद खाली थे. यानी करीब 23.7 प्रतिशत पद रिक्त थे.
हाईकोर्टों में भी 341 पद खाली
हाईकोर्टों की स्थिति भी चिंताजनक है. 1 जुलाई 2026 की स्थिति में देश के 25 हाईकोर्टों में 1,122 स्वीकृत न्यायिक पदों के मुकाबले 781 जज कार्यरत थे और 341 पद रिक्त थे. यानी करीब 30.4 प्रतिशत पद खाली थे. यह आंकड़ा भी केंद्रीय कानून मंत्रालय की ओर से संसद में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों पर आधारित है.
इस तरह देश की न्यायिक व्यवस्था में दो स्तरों पर बड़ी रिक्तियां दिखाई देती हैं. जिला एवं अधीनस्थ अदालतों में 7,310 पद और हाईकोर्टों में 341 पद खाली थे. हालांकि दोनों आंकड़ों की तारीख अलग-अलग है, इसलिए इन्हें एक ही तारीख की संयुक्त रिक्ति के रूप में नहीं जोड़ा जाना चाहिए.
झारखंड के सामने अब दोहरी चुनौती
झारखंड में न्यायिक सेवा भर्ती रद्द होने को मार्च 2024 की 211 रिक्तियों का सीधा कारण नहीं कहा जा सकता, क्योंकि दोनों घटनाओं के बीच समय का अंतर है. लेकिन केंद्र सरकार के अपने आंकड़े यह जरूर दिखाते हैं कि राज्य की अधीनस्थ न्यायपालिका में रिक्तियां पहले से बड़ी समस्या रही हैं.

अब परीक्षा रद्द होने के बाद सरकार और न्यायपालिका के सामने दोहरी चुनौती है. एक तरफ नई भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत बनाना होगा, दूसरी तरफ अदालतों में खाली पदों को भरने की प्रक्रिया भी तेज करनी होगी.
जूनियर डिवीजन की अदालतें आम लोगों के न्याय से सीधे जुड़ी हैं. ऐसे में झारखंड में 311 में से 172 जूनियर जजों के पद खाली होने का आंकड़ा केवल प्रशासनिक रिक्ति नहीं, बल्कि न्यायिक क्षमता से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल है.
झारखंड में मार्च 2024 तक जूनियर जजों के 55 प्रतिशत से अधिक पद खाली थे. वहीं 23 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया कि देश की जिला एवं अधीनस्थ अदालतों में 7,310 न्यायिक पद रिक्त हैं. अब झारखंड में न्यायिक सेवा परीक्षा रद्द होने के बाद सवाल यही है कि नई और भरोसेमंद नियुक्ति प्रक्रिया कब शुरू होगी और अदालतों की खाली कुर्सियां कब भरेंगी.


