रांची: झारखंड में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए कल (24 अगस्त) का दिन बेहद महत्वपूर्ण है. एक तरफ जहां झारखंड हाई कोर्ट राज्य सरकार द्वारा विभिन्न विभागों की नियुक्ति प्रक्रियाओं और विज्ञापनों को रद किए जाने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करेगा, वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट में जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में गड़बड़ी की सीबीआई जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई होगी.
झारखंड हाई कोर्ट: 22 रद और 6 स्थगित परीक्षाओं पर सुनवाई
जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ में राज्य सरकार के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई निर्धारित की गई है, जिसके तहत बड़े पैमाने पर जारी विज्ञापनों और चयन प्रक्रियाओं को निरस्त या स्थगित किया गया था. उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने 18 अगस्त को एक अधिसूचना जारी कर 22 भर्ती परीक्षाओं को रद करने, छह परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने और 17 अन्य परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने का निर्णय लिया था. अभ्यर्थियों और प्रार्थियों ने अदालत से गुहार लगाई है कि जिन विज्ञापनों के तहत आवेदन लिए जा चुके थे और प्रक्रिया अंतिम चरण में थी, उन्हें रद करना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है. 20 अगस्त को अभ्यर्थियों के आग्रह पर अदालत ने त्वरित सुनवाई के लिए 24 अगस्त की तिथि तय की थी.
सुप्रीम कोर्ट: JPSC 14वीं सिविल सेवा परीक्षा की CBI जांच की मांग
इसी क्रम में, जेपीएससी की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 और सीजीएल परीक्षा में कथित अनियमितताओं और धांधली के मामले पर देश की सर्वोच्च अदालत में भी सुनवाई होगी. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस जनहित याचिका की सुनवाई करेगी. सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन द्वारा अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि 19 अप्रैल को आयोजित जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के संचालन और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में गंभीर धांधली हुई है. याचिका में मांग की गई है कि इस परीक्षा को तत्काल प्रभाव से रद कर नए सिरे से निष्पक्ष परीक्षा आयोजित कराई जाए और पूरे प्रकरण की स्वतंत्र, व्यापक तथा समयबद्ध सीबीआई जांच के आदेश दिए जाएं.
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