खान एवं खनिज अधिनियम (MMDR) को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने शनिवार को केंद्र सरकार के खिलाफ राज्यव्यापी धरना-प्रदर्शन किया. इसी कड़ी में पलामू के नीलांबर-पीतांबरपुर प्रखंड मुख्यालय में भी पार्टी कार्यकर्ताओं ने धरना दिया. झामुमो नेताओं ने केंद्र की खनिज नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि झारखंड की जमीन से निकलने वाले खनिजों से जुड़े फैसलों में राज्य और स्थानीय लोगों के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
धरना के बाद झामुमो नेताओं ने प्रखंड विकास पदाधिकारी को राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा. इसमें खान एवं खनिज से जुड़े कानून और नीतियों को लेकर पार्टी की आपत्तियां दर्ज कराई गईं. पार्टी ने खनिज संसाधनों से जुड़े फैसलों में झारखंड के हितों को प्राथमिकता देने के साथ ही स्थानीय लोगों के अधिकार और ग्रामसभा की भूमिका सुनिश्चित करने की मांग की.
कार्यक्रम की शुरुआत अमर शहीद नीलांबर-पीतांबर की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई. इसके बाद पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने MMDR Act और झारखंड के खनिज संसाधनों से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी.
झामुमो ने कहा- झारखंड के खनिज पर राज्य के हितों को मिले प्राथमिकता
झामुमो के वरिष्ठ नेता सन्नी शुक्ला ने भाजपा पर झारखंड के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि झारखंड के लोगों के हक और अधिकार से किसी भी तरह का समझौता नहीं होने दिया जाएगा.
उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मंईयां सम्मान योजना का जिक्र करते हुए कहा कि योजना के जरिए परिवारों को आर्थिक मदद मिली है. शुक्ला ने आरोप लगाया कि भाजपा खान एवं खनिज अधिनियम के जरिए ऐसी योजनाओं को प्रभावित करना चाहती है. उन्होंने कहा कि झामुमो झारखंड के लोगों के अधिकारों की लड़ाई लड़ता रहेगा.
वहीं अभिषेक सिंह ने कहा कि यह सवाल किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि झारखंड के हक और अधिकार का है. उन्होंने कहा कि झारखंड की जमीन से खनिज निकलता है, यहां के पहाड़ और जमीन प्रभावित होते हैं, ऐसे में खनिज संसाधनों से जुड़े फैसलों में राज्य के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि झारखंड ने अपने अधिकार संघर्ष के जरिए हासिल किए हैं. इसलिए जल, जंगल, जमीन और खनिज से जुड़े अधिकारों पर पार्टी चुप नहीं रहेगी. उन्होंने खनिज नीति में झारखंड के हित और अधिकार को प्राथमिकता देने की मांग की.
ग्रामसभा की भागीदारी से लेकर रोजगार और पुनर्वास तक की मांग
वरिष्ठ नेता आशुतोष विनायक ने MMDR कानून को झारखंड के जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों से जोड़ते हुए कहा कि खनन और नीलामी की प्रक्रिया में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए.
उन्होंने खास तौर पर ग्रामसभा की भूमिका की मांग की. उनका कहना था कि किसी इलाके में खनन होने पर उसका सीधा असर वहां रहने वाले लोगों पर पड़ता है. इसलिए खनन से जुड़े फैसलों में स्थानीय समुदाय की बात सुनी जानी चाहिए.
विनायक ने कहा कि खनन से होने वाले लाभ का हिस्सा स्थानीय लोगों तक पहुंचना चाहिए. इसके साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार, विस्थापन की स्थिति में उचित पुनर्वास और प्रभावित परिवारों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए.
उन्होंने कहा कि नीलांबर-पीतांबरपुर और पूरा पलामू अपने जल, जंगल, जमीन और खनिज अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाएगा. पार्टी की मांग है कि खनिज नीति में स्थानीय अधिकार, ग्रामसभा की भागीदारी और झारखंड के हितों की स्पष्ट गारंटी हो.
राष्ट्रपति के नाम BDO को सौंपा ज्ञापन
धरना-प्रदर्शन के समापन के बाद झामुमो नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन प्रखंड विकास पदाधिकारी को सौंपा. ज्ञापन के जरिए खान एवं खनिज अधिनियम को लेकर पार्टी की आपत्तियों और मांगों से अवगत कराया गया.
मौके पर मुकेश चौधरी, आंदोलनकारी यमुना सिंह, वरिष्ठ नेता शिवशंकर पासवान, सचिव कुलदीप यादव, सुनील सिंह और मनोज प्रसाद समेत कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे.
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