विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों को आगे बढ़ने के लिए ज्यादा संसाधन और वित्तीय अधिकार मिलें. झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने दिल्ली में हुई बैठक में केंद्र के सामने राज्य की वित्तीय स्थिति से जुड़े कई मुद्दे उठाए. उन्होंने खनन पर सेस लगाने का अधिकार राज्यों को वापस देने, GST लागू होने के बाद हुए राजस्व नुकसान की भरपाई करने और जी-राम-जी योजना में केंद्र और राज्य के बीच 90:10 के वित्तीय अनुपात को फिर से लागू करने की मांग की.
भारत मंडपम में 18 और 19 सितंबर को ‘विकसित भारत की यात्रा के वित्तपोषण’ विषय पर दो दिवसीय सम्मेलन हुआ. इसमें केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री शामिल हुए.
झारखंड को 20 से 22 हजार करोड़ के नुकसान का दावा
वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र की नीतियों और खनिज क्षेत्र में हुए बदलावों का असर झारखंड के राजस्व पर पड़ा है. उनके मुताबिक, राज्य को 20,000 से 22,000 करोड़ रुपये तक की संभावित आर्थिक क्षति हो रही है.
झारखंड की अर्थव्यवस्था में खनन की बड़ी भूमिका है. राज्य के पास कोयला, लौह अयस्क समेत कई बड़े खनिज संसाधन हैं. ऐसे में खनन से मिलने वाले राजस्व में बदलाव का सीधा असर राज्य के खजाने पर पड़ता है. इसी को लेकर राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र से मांग की कि राज्यों को खनन पर सेस लगाने का अधिकार फिर से दिया जाए. उन्होंने GST लागू होने के बाद राजस्व में हुई कमी की भरपाई करने और जी-राम-जी योजना में केंद्र-राज्य की हिस्सेदारी 90:10 करने की मांग भी रखी.
वित्त मंत्री बोले- सिर्फ GDP बढ़ना ही विकास नहीं
राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत बनाने का मतलब सिर्फ GDP, प्रति व्यक्ति आय या औद्योगिक उत्पादन बढ़ाना नहीं है. यह भी देखना होगा कि आम लोगों की जिंदगी में कितना बदलाव आया है.
उन्होंने आय में असमानता और गरीबी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विकास का फायदा समाज के सभी वर्गों तक पहुंचना चाहिए. उन्होंने राजनीति में जाति और धर्म के आधार पर बढ़ते विभाजन को भी देश के समग्र विकास के सामने एक चुनौती बताया.
वित्त मंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए खेती के साथ सिंचाई, पशुपालन, मछली पालन और दुग्ध उत्पादन में ज्यादा निवेश की जरूरत बताई.
उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी आज भी गांवों में रहती है और खेती का बड़ा हिस्सा बारिश पर निर्भर है. ऐसे में ग्रामीण इलाकों में निवेश बढ़ाए बिना आर्थिक विकास को व्यापक नहीं बनाया जा सकता. स्वास्थ्य और शिक्षा को भी उन्होंने विकास की बुनियादी जरूरत बताया.
झारखंड की वित्तीय स्थिति का भी जिक्र
सम्मेलन में वित्त मंत्री ने राज्य की वित्तीय स्थिति को भी सामने रखा. उन्होंने कहा कि झारखंड नीति आयोग की ‘अचीवर’ श्रेणी में है. उनके मुताबिक, राज्य का राजस्व संग्रह मजबूत है, राजकोषीय घाटा नियंत्रण में है और पूंजीगत खर्च भी ऊंचे स्तर पर है.
उन्होंने कहा कि राज्यों को पर्याप्त पैसा और वित्तीय अधिकार मिलेंगे, तभी वे अपने स्तर पर विकास की रफ्तार बढ़ा पाएंगे और विकसित भारत के लक्ष्य में प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे. सम्मेलन में झारखंड की ओर से वित्त सचिव प्रशांत कुमार, अपर सचिव कर्ण सत्यार्थी, संयुक्त सचिव चंद्रभूषण प्रसाद समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे.
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