केरलम के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, उनकी बेटी टी. वीणा और दामाद पी.ए. मोहम्मद रियास से जुड़ा कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) और एक्सालॉजिक (Exalogic) मामला फिर चर्चा में है. ईडी की रिपोर्ट पर राज्य के महाधिवक्ता और डायरेक्टर जनरल ऑफ प्रॉसिक्यूशन की कानूनी राय आ गई है. इसमें कहा गया है कि अगर ईडी की रिपोर्ट में बड़ा अपराध बनता है तो पुलिस FIR दर्ज कर सकती है. पुलिस चाहे तो FIR से पहले शुरुआती जांच भी कर सकती है.
ईडी ने सितंबर की शुरुआत में केरल के पुलिस प्रमुख को रिपोर्ट भेजी थी. इसमें पिनाराई विजयन, वीणा, रियास और कुछ दूसरे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी. ईडी का आरोप है कि CMRL से Exalogic Solutions को किए गए भुगतान के पीछे सिर्फ कारोबारी लेन-देन नहीं था, बल्कि कथित तौर पर रिश्वत का पैसा पहुंचाने की व्यवस्था थी.
पूरा मामला शुरू कहां से हुआ?
मामला CMRL और वीणा की कंपनी Exalogic Solutions के बीच हुए पैसों के लेन-देन से शुरू हुआ. आयकर विभाग की जांच में सामने आया था कि CMRL ने Exalogic और वीणा को करीब 2.78 करोड़ रुपये का भुगतान किया था.
बताया गया था कि यह पैसा IT और कंसल्टेंसी सेवाओं के बदले दिया गया. लेकिन जांच के दौरान इन सेवाओं को लेकर सवाल खड़े हुए. बाद में मामला ईडी की जांच तक पहुंचा.
ईडी का कहना है कि ये भुगतान असल में सेवाओं के बदले नहीं थे, बल्कि इनके जरिए कथित तौर पर कुछ लोगों को अनुचित फायदा पहुंचाया गया.
पिनाराई विजयन पर क्या आरोप है?
ईडी की रिपोर्ट में आरोप है कि CMRL से जुड़े पैसों के जरिए पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को भी कथित तौर पर फायदा पहुंचाया गया. एजेंसी ने CMRL के पूर्व वित्त अधिकारी पी. सुरेश कुमार के बयान और दूसरे दस्तावेजों का हवाला दिया है.
ईडी के मुताबिक, CMRL से वीणा और Exalogic से जुड़े खातों में करीब 2.78 करोड़ रुपये पहुंचे और कुल करीब 3.28 करोड़ रुपये के लेन-देन को एजेंसी ने अपनी जांच में शामिल किया है. ईडी ने इन पैसों को पिनाराई विजयन से जोड़ते हुए इसे कथित रिश्वत का हिस्सा बताया है.
हालांकि, यहां यह साफ करना जरूरी है कि ये ईडी के आरोप हैं और अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं.
रियास का नाम कैसे आया?
इस मामले में पिनाराई विजयन के दामाद और विधायक पी.ए. मोहम्मद रियास का नाम भी ईडी की रिपोर्ट में है. ईडी ने कथित तौर पर पैसों के ट्रांसफर और विदेश भेजे गए पैसे से जुड़े लेन-देन की जांच की है. रिपोर्ट में कथित हवाला लेन-देन का भी जिक्र है. रियास ने इन आरोपों को खारिज किया है.
ईडी की रिपोर्ट आने के बाद राज्य सरकार ने महाधिवक्ता से पूछा था कि इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस क्या कार्रवाई कर सकती है.
महाधिवक्ता और डायरेक्टर जनरल ऑफ प्रॉसिक्यूशन की राय में कहा गया है कि अगर ईडी की रिपोर्ट से संज्ञेय अपराध सामने आता है तो पुलिस FIR दर्ज कर सकती है. अगर पुलिस को पहले तथ्यों की जांच जरूरी लगती है तो शुरुआती जांच भी की जा सकती है.
कानूनी राय में PMLA की धारा 66(2) का भी हवाला दिया गया है. इसी प्रावधान के तहत ईडी ने अपनी जांच में सामने आई जानकारी राज्य पुलिस को भेजी है.
भ्रष्टाचार कानून के तहत भी जांच हो सकती है
मामले में Prevention of Corruption Act के तहत भी कार्रवाई की संभावना है. कानूनी राय में कहा गया है कि किसी सरकारी कर्मचारी या लोक सेवक को सीधे या किसी दूसरे व्यक्ति के जरिए अनुचित फायदा पहुंचाना भ्रष्टाचार कानून के दायरे में आ सकता है.
लेकिन सिर्फ आरोप लगना काफी नहीं होगा. जांच में यह भी देखना होगा कि रिश्वत की मांग, भुगतान और उसे स्वीकार करने से जुड़े जरूरी सबूत मौजूद हैं या नहीं.
मामले में ईडी की जांच को लेकर विवाद भी रहा है. CMRL के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने एजेंसी को दिए अपने पुराने बयानों से बाद में पीछे हटते हुए आरोप लगाया था कि उनसे दबाव में बयान लिए गए.
ईडी की रिपोर्ट में CMRL के पूर्व वित्त अधिकारी पी. सुरेश कुमार के बयान का भी इस्तेमाल किया गया है. इसलिए आगे की जांच में इन बयानों के साथ-साथ ईडी के दूसरे दस्तावेजों और पैसों के लेन-देन की भी जांच अहम होगी.
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