हजारीबाग के हुरहुरू स्थित कैंटोनमेंट मौजा की 50 डिसमिल खासमहाल जमीन को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के बीच हुआ टकराव अब राज्य की मुख्यधारा की राजनीति का केंद्र बन गया है. इस विवादित भूमि पर प्रशासन द्वारा बुलडोजर चलाकर अतिक्रमण हटाने के दौरान भारी हंगामा देखने को मिला.
दरअसल, सदर अंचलाधिकारी (CO) सह खासमहाल पदाधिकारी आशुतोष कुमार पुलिस बल और जेसीबी के साथ जमीन पर अतिक्रमण हटाने पहुँचे थे. प्रशासन का कहना है कि यह जमीन सरकारी खासमहाल की है, जिसकी पुरानी लीज मार्च 2008 में ही समाप्त हो चुकी है. बिना अनुमति के वहाँ पीसीसी सड़क और गौशाला का शेड तैयार किया गया था, जिसे हटाने के लिए प्रशासन ने कार्रवाई की.
वहीं, योगेंद्र साव पक्ष का दावा है कि यह जमीन पुश्तैनी है और उनके पास इसके कानूनी अधिकार व पावर ऑफ अटॉर्नी मौजूद हैं. उनका तर्क है कि जब तक सरकार विधिवत ‘रिज्यूमेशन’ (कानूनी अधिग्रहण) की प्रक्रिया पूरी नहीं करती, तब तक इस तरह की एकतरफा कार्रवाई नहीं की जा सकती.
मीडिया के समक्ष योगेंद्र साव का तीखा हमला
मौके पर विरोध प्रदर्शन के दौरान पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने मीडिया के समक्ष राज्य सरकार और सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर बेहद आक्रामक और तीखे राजनीतिक हमले किए. उन्होंने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि “हेमंत सोरेन वर्ल्ड में सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री में से हैं, जब फंसने लगते हैं तो कभी एल. ख्यांग्ते को बलि का बकरा बनाते हैं तो कभी विनय चौबे को बनाते हैं. इसलिए मुख्यमंत्री पूरा भ्रष्ट है.”
साव ने सरकार पर झारखंड के मूल अधिकारों—जल, जंगल और जमीन—को कॉरपोरेट और आउटसोर्सिंग के हाथों बेचने का गंभीर आरोप लगाया. उन्होंने दोटूक अंदाज में कहा कि प्रशासन चाहे उनके घर-मकान पर बुलडोजर चलवा दे, लेकिन वे सच बोलने से पीछे नहीं हटेंगे.
अंबा प्रसाद का बयान
इस पूरे घटनाक्रम और तीखे बयानों के बाद पूर्व मंत्री योगेंद्र साव की बेटी व कांग्रेस नेत्री अंबा प्रसाद की भी प्रतिक्रिया सामने आई. उन्होंने इस विवाद पर अपनी बात रखते हुए कहा कि प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध के नाम पर संवैधानिक शिष्टाचार को ताक पर रखकर मुख्यमंत्री पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना उनके पिता से अपेक्षित नहीं था. अंबा प्रसाद के इस बयान ने यह साफ कर दिया कि इस पूरे राजनीतिक और जमीन विवाद के बीच पारिवारिक स्तर पर भी बयानों को लेकर असहजता देखने को मिली है.
बयान के कारण पूर्व में कांग्रेस से निकाले गए थे योगेंद्र
मार्च 2026 में भी योगेंद्र साव कांग्रेस के निशाने पर आ चुके थे. उस समय बड़कागांव में एनटीपीसी की कोयला परियोजना के क्षेत्र में आने वाले उनके आवास को प्रशासन ने ध्वस्त किया था. कार्रवाई के बाद साव ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर राज्य सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ तीखी टिप्पणियां की थीं. कांग्रेस की अनुशासन समिति ने आरोप लगाया कि साव लगातार सोशल मीडिया के जरिए गठबंधन सरकार और मुख्यमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक और अनुशासनहीन टिप्पणियां कर रहे थे. समिति के मुताबिक, उनके बयानों से गठबंधन में असहज स्थिति पैदा हो रही थी और पार्टी की छवि भी प्रभावित हो रही थी. इसी आधार पर कांग्रेस ने उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तीन साल के लिए निष्कासित कर दिया था.
हालांकि, कांग्रेस ने जून 2026 में ही निष्कासन रद्द कर दिया था.
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