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    Home»झारखंड»करप्शन का अड्डा बना झारखंड वन विभाग, 100 करोड़ का अता-पता नहीं
    झारखंड

    करप्शन का अड्डा बना झारखंड वन विभाग, 100 करोड़ का अता-पता नहीं

    Team JoharBy Team JoharSeptember 11, 2023No Comments3 Mins Read
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    रांची : झारखंड का वन विभाग भ्रष्टाचार का आखाड़ा बनता जा रहा है. सीएम के अधीन वन विभाग में विवादों से घिरे अफसरों की सूची लंबी होती जा रही है. झारखंड कैडर में आइएफएस के 141 पद स्वीकृत हैं. लेकिन इसमें से 68 अफसर विवादों से घिरे हैं. कई पर गंभीर आरोप हैं. और कई पर विभागीय कार्यवाही  भी चल रही है. कई अफसरों के रिटायरमेंट के बाद भी विभागीय कार्यवाही खत्म नहीं हुई है. अब तक जिन अफसरों पर गंभीर आरोप लगा है, उनपर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ लीपापोती ही की गई. एक आईएफएस अफसर वी जयराम फरार भी घोषित कर दिये गये. आईएफएस अफसरों ने 100 करोड़ से भी अधिक की अनियमितता की है.

    हाथी दांत की तस्करी से लेकर कैंपा फंड घोटाला

    अफसरों पर प्रमुख रूप से हाथी दांत और जानवरों की खाल की तस्करी में सहयोग करने, अवैध आरा मिल को लाइसेंस देने, जंगल की जमीन बेचन, कैंपा फंड में घोटाला करने, एफडीए में सरकारी राशि का गबन,सोलर लैंप में घोटाला, सागवान-खैर की लकड़ी बेचने जैसे गंभीर आरोप हैं. इस पर कार्रवाई के नाम पर अब तक सिर्फ लीपापोती ही हुई है. आईएफएस अफसरों ने जानवरों का भी हक मारने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी. जानवरों के दिये जाने वाले मांस में भी कमिशन खाया. मांस की खरीद अन्य उद्यानों की तुलना में अधिक दर पर की. इस पर भी विभाग ने लीपापोती कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया. जैविक उद्यान में बाघ को प्रतिदिन आठ किलोग्राम, शेर को प्रतिदिन 10 किलोग्राम, तेंदुआ को प्रतिदिन छह किलोग्राम, लकड़बग्घा को प्रतिदिन चार किलोग्राम, गरूड़ को प्रतिदिन एक किलोग्राम मांस दिया जाता है. वहीं घड़ियाल को प्रतिदिन पांच किलोग्राम मछली व मुर्गा दिया जाता है.

    बिहार सरकार ने भी मांगी थी अभियोजन की स्वीकृति

    बिहार सरकार ने झारखंड कैडर के तीन आईएफएस अफसरों के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति मांगी थी. इसके बावजूद राज्य सरकार ने अभियोजन की स्वीकृति नहीं दी. एकीकृत बिहार के समय इन अफसरों पर कई गंभीर आरोप थे. इन अफसरों में बीसी निगम, सर्वेश सिंघल और महेंद्र कर्दम शामिल हैं. इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया.

    इन प्रमुख अफसरों पर क्या हैं आरोप

    • धीरेंद्र कुमार : झारक्राफ्ट के पूर्व एमडी: हाथी दांत तस्करी का आरोप
    • प्रदीप कुमार : पूर्व पीसीसीएफ- मांस खरीद में अनियमितता का आरोप
    • सीपी खंडूजा : अवैध आरा मिल को लाइसेंस देने का आरोप
    • प्रदीप कुमार : जंगल की जमीन बेचने का आरोप
    • बीएन द्विवेदी : राशि गबन का आरोप
    • आरके सिन्हा : राशि गबन का आरोप
    • सत्यजीत सिंह : सागवान और खैर की लकड़ी बेचने का आरोप
    • केएन ठाकुर : सरकारी वाहन बेचने का आरोप
    • कुमार आशुतोष : एफडीए में सरकारी राशि के गबन का आरोप
    • अजीत कुमार सिंह : कैंपा फंड में घोटाला का आरोप
    • नागेंद्र बैठा : कैंपा फंड में घोटाला का आरोप
    • यूएन विश्वास : कुनकी हाथी लाने में अनियमितता का आरोप
    • रवि रंजन : सरकारी राशि के गबन का आरोप

    इन अफसरों पर भी हैं गंभीर आरोप

    • बीसी निगम
    • सर्वेश सिंगल
    • महेंद्र कदर्म
    • पीसी मिश्र
    • अरविंद कुमार
    • नरेंद्र मिश्र
    • एके प्रभाकर
    • बलराम खालखो
    • शिवाशिस राम
    • •     वी जयराम
    100 करोड़ से अधिक अनियमितता Arena of Corruption CM hemant soren Dispute in Forest Department IFS in Jharkhand Cadre Irregularities of more than Rs 100 crore Jharkhand Forest Department Jharkhand news ranchi ranchi news V Jayaram झारखंड कैडर में आइएफएस झारखंड न्यूज झारखंड वन विभाग भ्रष्टाचार का आखाड़ा रांची रांची न्यूज वन विभाग में विवाद वी जयराम सीएम हेमंत सोरेन
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