जामताड़ा : विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर मांझी परगना सरदार महासभा और सिद्धू कानू मुर्मू सेवा समिति की ओर से स्थानीय गांधी मैदान में जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया. मांझी परगना सरदार महासभा के जिला अध्यक्ष सुनील हांसदा के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत वीर सिद्धू-कानू की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दिशोम गुरु वीर शिबू सोरेन समेत अन्य महानायकों के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई.
साल 2008 से शुरु हुई आदिवासी दिवस मनाने की परंपरा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुनील हांसदा ने कहा कि आदिवासियों के अधिकारों को लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ में पहली बार 9 अगस्त 1982 को बैठक आयोजित की गई थी. इसके बाद 9 अगस्त 1994 को विश्व आदिवासी दिवस घोषित किया गया. उन्होंने बताया कि जामताड़ा के ऐतिहासिक गांधी मैदान में वर्ष 2008 से विश्व आदिवासी दिवस मनाने की शुरुआत हुई थी. इस वर्ष यहां 19वां आयोजन किया गया, जिसमें सुदूरवर्ती क्षेत्रों से हजारों की संख्या में समाज के लोग शामिल हुए.
हड़िया दारु से दूर रहे आदिवासी
उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाना, लोगों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना, हड़िया-दारू से दूर रहकर शिक्षा की अलख जगाना और आदिवासी संस्कृति को संरक्षित रखना है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में गांधी मैदान आदिवासी संस्कृति से समृद्ध होकर हजारों-लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा.
कार्यक्रम में सभी वर्गों के लोगों का सहयोग मिला. महिला और पुरुष पारंपरिक आदिवासी परिधान में नजर आए. विभिन्न जिलों से पहुंचे कलाकारों ने आदिवासी गीतों पर पारंपरिक समूह नृत्य प्रस्तुत किया. सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में आदिवासी विरासत और सामुदायिक एकजुटता की जीवंत झलक पेश की.



