Ranchi : झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के छठे दिन सदन में जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई। खराब पड़े हैंडपंप, शहरों में पेयजल आपूर्ति की दिक्कत और ग्राम सेतु योजना के तहत पुल निर्माण में आ रही रुकावटों को लेकर विधायकों ने सरकार को घेरा। मंत्रियों ने अपनी तरफ से स्थिति साफ की और आश्वासन दिया कि समाधान की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
गर्मी से पहले हैंडपंप दुरुस्त करने की तैयारी
सारठ से विधायक उदय शंकर सिंह ने अल्पसूचित प्रश्न के जरिए राज्य भर में खराब पड़े हैंडपंपों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि गर्मी आने से पहले अगर मरम्मत नहीं हुई तो गांवों में पानी के लिए लोगों को परेशान होना पड़ेगा। इस पर जल संसाधन विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने बताया कि विभाग ने सभी खराब हैंडपंपों की मरम्मत की तैयारी पूरी कर ली है। एक टोल फ्री नंबर भी जारी किया गया है ताकि लोग सीधे शिकायत दर्ज करा सकें। शिकायत मिलते ही टीम भेजकर मरम्मत कराई जाएगी। विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने भी कहा कि गर्मी के दिनों में पानी सबसे बड़ी जरूरत होती है। ऐसे में काम में ढिलाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि मरम्मत का काम तेजी से पूरा होना चाहिए ताकि लोगों को राहत मिले।
देवघर में पेयजल योजना क्यों लटकी
देवघर शहर में पेयजल आपूर्ति की समस्या भी सदन में गूंजी। विधायक सुरेश पासवान ने पूछा कि पुनाशी जलाशय से देवघर तक पाइपलाइन बिछाने की योजना में देरी क्यों हो रही है। नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने बताया कि समझौते के मुताबिक इस परियोजना को जुलाई 2023 तक पूरा होना था। लेकिन जिस जमीन पर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और ग्राउंड लेवल सर्विस रिजर्वायर बनना है, वह वन भूमि है। वन विभाग से एनओसी नहीं मिलने की वजह से काम अटक गया। उन्होंने कहा कि जरूरी अनुमति मिलते ही काम आगे बढ़ाया जाएगा।
ग्राम सेतु योजना में 10 करोड़ की सीमा पर बहस
ग्राम सेतु योजना के तहत पुल निर्माण में आ रही दिक्कतों को लेकर विधायक अमित कुमार यादव ने सवाल उठाया। उनका कहना था कि कई जगह पुल की लंबाई ज्यादा होती है, जिससे तय की गई 10 करोड़ रुपये की राशि कम पड़ जाती है। ऐसे में काम अधूरा रह जाता है। इस मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र में पिछले 15 साल से एक पुल का निर्माण नहीं हो सका क्योंकि लागत ज्यादा थी और राशि सीमित। ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने जवाब में कहा कि नियम के मुताबिक विधायक की अनुशंसा पर अधिकतम 10 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी जा सकती है। इससे अधिक राशि की मंजूरी का प्रावधान नहीं है। उन्होंने साफ किया कि यह वित्तीय सीमा नियमावली के अनुसार तय है और इसका पालन जरूरी है।
जनता से जुड़े मुद्दों पर सख्ती की जरूरत
सदन की चर्चा से साफ है कि पानी और पुल जैसे बुनियादी मुद्दे अब भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं। विधायकों ने कहा कि वित्तीय सीमा और प्रशासनिक अड़चनें विकास की रफ्तार धीमी कर रही हैं। वहीं सरकार का कहना है कि नियमों के दायरे में रहकर ही काम किया जा सकता है।
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