जमशेदपुर/रांची। शहर में अपराध पर लगाम लगाने और आम लोगों को सुरक्षित माहौल देने के लिए पुलिस की रात्रि गश्ती जरूरी है. लेकिन जब यही गश्ती आम नागरिकों के लिए असहजता और डर का कारण बनने लगे तो पुलिस के तौर-तरीकों पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
जमशेदपुर में देर रात पुलिस की एक कार्रवाई को लेकर ऐसा ही सवाल खड़ा हुआ है. बिष्टुपुर थाना प्रभारी निरंजन कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने देर रात सड़क पर मौजूद आम लोगों के साथ सख्ती दिखाई. अपराध पर लगाम कसने की बजाय आम जनता पर लाठियां बरसाने में अपनी मर्दांगनी समझे.
सवाल यह है कि रात में अपने काम से लौट रहे, फिल्म देखकर घर जा रहे, सड़क किनारे कुछ देर टहल रहे या आइसक्रीम खाने निकले आम नागरिकों को पुलिस सुरक्षा का भरोसा देगी या उनसे इस तरह पेश आएगी कि वे अगली बार रात में घर से निकलने से पहले भी सोचने लगें.
पुलिस की मुख्य जिम्मेदारी अपराध रोकने की, नागरिकों को डराने की नहीं
पुलिस का मूल उद्देश्य अपराधियों पर कार्रवाई करना और नागरिकों को सुरक्षित वातावरण देना है. देर रात शहर की सड़कों पर पुलिस की मौजूदगी आम लोगों में सुरक्षा का भाव पैदा करे, यही रात्रि गश्ती का मकसद होना चाहिए.
ऐसे में अगर किसी आम नागरिक को यह महसूस होने लगे कि रात में सड़क पर निकलना ही पुलिस की पूछताछ या सख्ती का कारण बन सकता है, तो यह पुलिस-पब्लिक संबंधों के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जा सकता. यानी सवाल रात्रि गश्ती का नहीं, बल्कि गश्ती के दौरान आम नागरिकों के साथ व्यवहार और पुलिस की जवाबदेही का है.
पुलिस-पब्लिक संबंध सुधारने के निर्देश, जमीन पर हकीकत कुछ और
राज्य में पुलिस और जनता के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत लगातार महसूस की जाती रही है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद पुलिस की रवैये को लेकर समय-समय पर समीक्षा कर दिशा निर्देश देते है. इसके बावजूद जमशेदपुर पुलिस पर इसका कोई असर नहीं दिखता है.
पिछले एक महीने में जमशेदपुर में अपराध की बड़ी घटनाएं
1. बिंदल मॉल फायरिंग — 26 सितंबर
सोनारी थाना क्षेत्र के मरीन ड्राइव स्थित बिंदल मॉल के पास फायरिंग की घटना में तीन लोग घायल हुए। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच शुरू की। पुलिस के अनुसार घटना के पीछे आपसी विवाद का पहलू भी जांच में है।
2. केनरा बैंक डकैती — सितंबर के अंतिम सप्ताह
गोलमुरी क्षेत्र में हथियारबंद बदमाशों ने बैंक कर्मचारियों और सुरक्षा गार्ड को बंधक बनाकर कैश और सोना लूटा. पुलिस के मुताबिक करीब 42 लाख रुपये नकद और करीब 23 किलो सोना लूटा गया. मामले में 20 सदस्यीय एसआईटी जांच कर रही है.
3. गणेश विसर्जन के दौरान झड़प — 21 सितंबर
गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान दो पक्षों के बीच झड़प और पथराव में तीन लोगों के घायल होने की खबर सामने आई. पुलिस ने मामले की जांच के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगालने की बात कही.
4. बर्मामाइंस में जानलेवा हमला — 7 सितंबर
बर्मामाइंस के इंदर सिंह एरिया में रात के समय हुए हमले के मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया. अन्य नामजद और अज्ञात आरोपियों की तलाश जारी होने की जानकारी दी गई.
5. जुगसलाई में हिंसक तनाव — सितंबर का पहला सप्ताह
बछड़े की चोरी के बाद जुगसलाई इलाके में दो पक्षों के बीच तनाव और झड़प की स्थिति बनी. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और क्यूआरटी को तैनात किया गया तथा लाठीचार्ज की बात सामने आई. पुलिस ने हवाई फायरिंग की बात से इनकार किया था.
6. निखार सबलोक हत्याकांड — अगस्त के अंतिम सप्ताह
होटल व्यवसायी निखार सबलोक की हत्या के मामले में पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार शरीर में 11 गोलियां लगने की बात सामने आई थी.
औद्योगिक शहर में पुलिस की सख्ती किसके लिए ?
जमशेदपुर जैसे बड़े औद्योगिक शहर में अपराधियों के खिलाफ पुलिस की सख्ती जरूरी है. लेकिन उसी सख्ती का दूसरा चेहरा आम नागरिक के सामने नहीं आना चाहिए. अगर कोई व्यक्ति देर रात अपने परिवार के साथ घर लौट रहा है, नौकरी या कारोबार से लौट रहा है अथवा सामान्य तरीके से सड़क पर मौजूद है, तो पुलिस की मौजूदगी उसके लिए सुरक्षा की गारंटी होनी चाहिए, डर का कारण नहीं. अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई में पुलिस जितनी सख्ती दिखाए, उतनी ही संवेदनशीलता आम जनता के प्रति भी जरूरी है.

