Ranchi : रांची विश्वविद्यालय में ‘नीड बेस्ड’ असिस्टेंट प्रोफेसरों के मानदेय भुगतान को लेकर विवाद तेज हो गया है। विश्वविद्यालय के वित्त पदाधिकारी डॉ. दिलीप ने मौजूदा भुगतान प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए नियमों के आधार पर प्रूफ मांगा है, जिससे मामला और गरमा गया है।
वित्त पदाधिकारी ने उठाए कई अहम सवाल
वित्त पदाधिकारी ने विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र लिखकर कई बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब मांगा है। उनका कहना है कि अगर कोई शिक्षक 16 दिनों में केवल 64 कक्षाएं ले रहा है, तो उसे पूरा मानदेय 57,700 रुपये किस आधार पर दिया जा रहा है। इसके अलावा अनियमित उपस्थिति के बावजूद पूरा भुगतान कैसे हो रहा है, इस पर भी सवाल उठाया गया है। साथ ही प्रति कक्षा 900 रुपये की कटौती का नियम लागू है या नहीं, इस पर भी स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है।
भुगतान प्रक्रिया पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में भुगतान प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। वित्त पदाधिकारी का कहना है कि नियमों के अनुसार भुगतान होना चाहिए और हर बिंदु पर उचित रिकॉर्ड और प्रमाण होना जरूरी है। इसी वजह से उन्होंने विस्तृत जानकारी और दस्तावेजों की मांग की है।
‘नीड बेस्ड’ एसोसिएशन का पलटवार
वहीं दूसरी तरफ ‘नीड बेस्ड’ असिस्टेंट प्रोफेसरों के एसोसिएशन ने विश्वविद्यालय के इस कदम को अवैधानिक बताया है। एसोसिएशन के महासचिव डॉ. राम कुमार तिर्की ने कहा कि शिक्षक सरकार द्वारा निर्धारित संकल्प के अनुसार ही मानदेय प्राप्त कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह मामला पहले से ही हाईकोर्ट में लंबित है, ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन का नया आदेश जारी करना उचित नहीं है।
बिना संवाद के आदेश पर आपत्ति
एसोसिएशन ने यह भी कहा कि बिना किसी पूर्व सूचना या बातचीत के इस तरह का आदेश जारी करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। उनका मानना है कि पहले सभी पक्षों से चर्चा होनी चाहिए थी, उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए था।
Also Read : पटना पुलिस के हत्थे चढ़े तीन साइबर ठग, सरकारी योजना के नाम पर करते थे खेला

