Bokaro : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर शिबू सोरेन समृति भवन (टाउन हॉल) सभागार में आयोजित महोत्सव में DC अजय नाथ झा ने महिलाओं और बेटियों को समाज में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि महिलाएं खुद आगे बढ़कर जिम्मेदारी की कमान संभालें और बेटियों को सिर्फ शादी तक सीमित न समझा जाए।
बेटा-बेटी में भेदभाव खत्म करना होगा
DC ने कहा कि समाज में परिवर्तन लंबी प्रक्रिया है। लगभग 100 साल पहले तक सती प्रथा जैसी कुप्रथाएं सामान्य मानी जाती थीं, लेकिन जागरूकता और सामूहिक प्रयासों से इन्हें इतिहास बनाया गया। उसी तरह बेटा-बेटी में भेदभाव करने वाली मानसिकता को भी समाज से हटाना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक सोच में बदलाव नहीं आएगा, तब तक वास्तविक समानता संभव नहीं है।
महिलाओं को मंच मिला, लेकिन चुनौतियां बाकी
DC ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए किए गए कदमों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने बाल विवाह विरोधी अभियान, “बधाई हो बेटी हुई है” जैसे कार्यक्रम और पंचायतों में आरक्षण जैसी योजनाएं लागू की हैं। इससे महिलाओं को आगे आने का अवसर मिला। लेकिन उन्होंने यह भी बताया कि कई जगहों पर महिलाएं केवल औपचारिक रूप से पद पा रही हैं, लेकिन निर्णय लेने की शक्ति पुरुषों के हाथ में रहती है। उन्होंने कहा कि मुखिया पति जैसी प्रवृत्तियां इसे दर्शाती हैं और इसे बदलना जरूरी है।
महिलाओं को खुद नेतृत्व संभालना होगा
DC ने कहा कि अब समय है कि महिलाएं खुद आगे आएं और जिम्मेदारी उठाएं। उन्होंने झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। DC ने स्पष्ट किया कि मंईयां सम्मान योजना से महिलाओं के उत्थान और सम्मान की नई शुरुआत की गई है और जिला प्रशासन ने इसे लागू करने का संकल्प लिया है।
बेटियां समाज और देश की अहम ह्यूमन रिसोर्स
DC ने कहा कि बेटियों का जन्म केवल शादी के लिए नहीं हुआ। वे समाज, राज्य और देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली मानव संसाधन हैं। उन्होंने परिवार और समाज से अपील की कि बेटियों को शिक्षा, अवसर और प्रोत्साहन दें ताकि वे अपने सपनों को साकार कर सकें।
छोटे बदलाव भी समाज में संदेश देते हैं
DC ने कहा कि समाज में सम्मान और समानता की भावना बढ़ाने के लिए छोटे बदलाव भी जरूरी हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि घर के बोर्ड पर पहले पत्नी का नाम लिखना, बेटियां अपनी पसंद का पहनावा पहनें और अपने फैसले खुद लें, ऐसे कदम समाज में सम्मान का संदेश देते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पति के निधन के बाद महिला बिंदी लगाए या न लगाए, यह उसका व्यक्तिगत निर्णय होना चाहिए और समाज को उसका सम्मान करना चाहिए।
बेटियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें
DC ने अंत में सभी से अपील की कि बेटियों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें और ऐसा वातावरण बनाएं जहां महिलाएं सम्मान, आत्मविश्वास और स्वतंत्रता के साथ जीवन जी सकें।
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