Dhanbad : धनबाद में आईआईटी-आईएसएम के विशेषज्ञों ने बीसीसीएल प्रोजेक्ट से प्रभावित परिवारों (PAP) के बच्चों के लिए एक खास इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में विज्ञान और तकनीक के प्रति रुचि बढ़ाना और उन्हें STEM यानी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स की पढ़ाई को आसान और मजेदार तरीके से समझाना था।
9वीं और 10वीं के 85 छात्रों ने लिया हिस्सा
यह कार्यक्रम एचएस भुलीनगर, धनबाद में आयोजित किया गया, जिसमें कक्षा 9 और 10 के कुल 85 छात्रों ने हिस्सा लिया। आईआईटी-आईएसएम की टीम ने बच्चों को रोजमर्रा की चीजों से जुड़े छोटे-छोटे प्रयोग कराकर विज्ञान के सिद्धांत समझाए। इससे बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ प्रयोग के जरिए विज्ञान को समझने का मौका मिला।
तीन तरीकों से समझाया गया विज्ञान
कार्यक्रम का संचालन प्रो. रश्मि सिंह के नेतृत्व में किया गया। उन्होंने बच्चों को विज्ञान समझाने के लिए तीन तरीकों का इस्तेमाल किया विजुअल, लॉजिकल और प्रयोग आधारित तरीका। इस तरीके से छात्रों को विज्ञान की जटिल बातों को भी आसानी से समझने में मदद मिली।
रोचक प्रयोगों से बच्चों में बढ़ी दिलचस्पी
सत्र के दौरान बच्चों को कई रोचक प्रयोग भी दिखाए गए। इनमें बेकिंग सोडा और सिरका से गुब्बारा फुलाने वाला प्रयोग, मोमबत्ती की मदद से पानी के ऊपर उठने का प्रयोग और हल्दी को प्राकृतिक pH इंडिकेटर के रूप में इस्तेमाल करने वाला प्रयोग शामिल था। इन प्रयोगों के जरिए बच्चों को केमिकल रिएक्शन और वैज्ञानिक सिद्धांतों को सरल भाषा में समझाया गया।
विज्ञान में करियर के लिए प्रेरित करने की पहल
कार्यक्रम के सह-समन्वयक प्रो. नीलाद्रि दास ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों में विज्ञान और तकनीक के प्रति रुचि पैदा करना है, ताकि वे आगे चलकर इन क्षेत्रों में पढ़ाई और करियर बनाने के बारे में सोच सकें।
CSR पहल के तहत हुआ आयोजन
यह कार्यक्रम बीसीसीएल की कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) पहल के तहत आयोजित किया गया। इसे आईआईटी-आईएसएम और बीसीसीएल के संयुक्त प्रयास से सफल बनाया गया। इस मौके पर स्कूल की प्रिंसिपल अर्चना कुमारी, शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे।
आगे भी होंगे ऐसे कार्यक्रम
आईआईटी-आईएसएम की टीम ने बताया कि आने वाले समय में बीसीसीएल क्षेत्र के अन्य स्कूलों में भी इसी तरह के STEM वर्कशॉप और इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किए जाएंगे, ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चों को विज्ञान और तकनीक से जोड़ा जा सके।
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