Ranchi : रांची में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के मेडिकल कॉलेज में 50 सीट पर एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू करने की अनुमति नेशनल मेडिकल कमिशन (एनएमसी) से नहीं मिली। इसके लिए ईएसआईसी ने अप्रैल 2025 में आवेदन किया था, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के कारण पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी।
ईएसआईसी ने पहले ही 30 डॉक्टर-प्रोफेसरों की नियुक्ति कर दी थी, जिनमें से पांच ने इस्तीफा दे दिया। बचे हुए 25 प्रोफेसरों को अप्रैल से नवंबर तक करीब 3 करोड़ रुपये का वेतन दिया गया। अब सवाल उठ रहा है कि पढ़ाई शुरू नहीं हुई, फिर भी फैकल्टी पर इतना खर्च क्यों हुआ।
डीन आर. संध्या ने बताया कि मेडिकल कॉलेज खोलने और पढ़ाई शुरू करने के लिए एनएमसी की गाइडलाइन के अनुसार कॉलेज बिल्डिंग, हॉस्टल, हॉस्पिटल, फैकल्टी और स्टाफ सहित अन्य सभी मापदंडों का पालन करना जरूरी है। इसलिए पढ़ाई की अनुमति से पहले 30% फैकल्टी की नियुक्ति अनिवार्य थी।
ईएसआईसी ने बताया कि फैकल्टी का वेतन सिर्फ बैठाने के लिए नहीं दिया गया। उन्हें हॉस्पिटल के ओपीडी और कैजुअल्टी में भी तैनात किया गया है, साथ ही हेल्थ कैंप और अवेयरनेस प्रोग्राम में भी लगाया गया।
ईएसआईसी ने नए एकेडमिक सेशन 2026-27 के लिए फिर से एमबीबीएस पढ़ाई की अनुमति के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। डॉ. विमलेश कुमार सिंह, रजिस्ट्रार झारखंड स्टेट मेडिकल काउंसिल ने कहा कि अनुमति न मिलने पर फैकल्टी और स्टाफ पर हुए खर्च का नुकसान संस्था को उठाना पड़ता है।


