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    Home»झारखंड»ESI ने HEC को ठहराया डिफॉल्टर, 500 अस्थायी कर्मियों का इलाज रुका
    झारखंड

    ESI ने HEC को ठहराया डिफॉल्टर, 500 अस्थायी कर्मियों का इलाज रुका

    Team JoharBy Team JoharApril 11, 2026Updated:April 11, 2026No Comments3 Mins Read3
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    HEC
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    Ranchi : रांची की हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (HEC) एक बार फिर विवादों में है। कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) विभाग ने कंपनी को डिफॉल्टर घोषित कर दिया है। साफ कहा गया है कि अगर जल्द बकाया राशि जमा नहीं की गई तो कानूनी कार्रवाई होगी। इस मामले में ESI के डिप्टी डायरेक्टर राजेंद्र टुडू ने HEC प्रबंधन से बात कर जल्द भुगतान सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही अस्थायी कर्मियों से जुड़ा पूरा लेखा-जोखा ESI कार्यालय में जमा करने का निर्देश भी दिया गया है।

    26 महीने से वेतन की मार

    HEC के कर्मचारियों की हालत पहले से ही खराब है। पिछले करीब 26 महीनों से उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा। कभी दो महीने तो कभी तीन महीने के अंतराल पर पैसे मिलते हैं। ऐसे में घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी चुनौती बन गया है।

    500 कर्मियों पर सबसे ज्यादा असर

    सबसे ज्यादा परेशानी HEC में काम कर रहे करीब 500 अस्थायी कर्मचारियों को हो रही है। इनके वेतन से हर महीने ESI के नाम पर पैसे काटे जा रहे हैं, लेकिन यह रकम संबंधित खाते में जमा नहीं हो रही। नतीजा यह है कि पिछले लगभग नौ महीनों से इन कर्मचारियों को ESI के तहत इलाज की सुविधा नहीं मिल रही है।

    अस्पताल से लौटाए जा रहे कर्मचारी

    कर्मचारियों का कहना है कि जब वे ESI अस्पताल इलाज के लिए जाते हैं, तो उनका डेटा अपडेट नहीं होने की बात कहकर वापस लौटा दिया जाता है। इससे कर्मचारियों में गुस्सा भी है और बेबसी भी। उनका कहना है कि पैसे कट रहे हैं, लेकिन सुविधा नहीं मिल रही, यह सीधे तौर पर उनके अधिकारों का उल्लंघन है।

    परिजनों के इलाज में भी दिक्कत

    स्थिति तब और खराब हो जाती है जब किसी कर्मचारी या उसके परिवार में कोई गंभीर रूप से बीमार हो जाता है। आर्थिक तंगी के कारण निजी अस्पताल में इलाज कराना संभव नहीं है। कई लोग इलाज टाल रहे हैं, तो कुछ कर्ज लेकर दवा खरीदने को मजबूर हैं। इसका असर बच्चों की पढ़ाई और पूरे परिवार की जिंदगी पर पड़ रहा है।

    किसकी जिम्मेदारी, जांच शुरू

    अब कंपनी मुख्यालय में यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर ESI के नाम पर काटी गई रकम जमा क्यों नहीं हुई। यह भी जांच हो रही है कि कंपनी से पैसा मिलने के बाद किन-किन संवेदकों ने ESI मद में रकम जमा नहीं की। सालवार पूरा हिसाब तैयार किया जा रहा है।

    समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

    अस्थायी कर्मचारियों ने साफ कहा है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उनका कहना है कि वे लंबे समय से परेशानी झेल रहे हैं, अब और इंतजार करना मुश्किल है।

    ESI अधिकारी का बयान

    ESI के डिप्टी डायरेक्टर राजेंद्र टुडू ने कहा कि कर्मचारियों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि HEC इस मामले में डिफॉल्टर है और कंपनी से जल्द पूरा लेखा-जोखा मांगा गया है, ताकि कर्मचारियों को फिर से इलाज की सुविधा मिल सके।

    Also Read : ESI ने HEC को ठहराया डिफॉल्टर, 500 अस्थायी कर्मियों का इलाज रुका

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