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    Home»क्राइम»मैगी में सीसा ढूँढते-ढूँढते बीत गए 11 साल, दिल्ली हाईकोर्ट ने केस किया खारिज, बोला – अब बंद करो ये खींचतान
    क्राइम

    मैगी में सीसा ढूँढते-ढूँढते बीत गए 11 साल, दिल्ली हाईकोर्ट ने केस किया खारिज, बोला – अब बंद करो ये खींचतान

    Joharlive NetworkBy Joharlive NetworkAugust 8, 2026No Comments3 Mins Read2
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    दिल्ली हाईकोर्ट ने 2015 के चर्चित मैगी विवाद से जुड़े दो आपराधिक मामलों को खारिज कर दिया है. अदालत का कहना है कि बाद की वैज्ञानिक जांचों और न्यायिक फैसलों के बाद इस आपराधिक मुकदमे की बुनियाद कमजोर हो चुकी है, लिहाजा इसे जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा.

    क्या था पूरा मैगी विवाद?

    साल 2015 की शुरुआत में नेश्ले के मैगी नुडल्स पर आरोप लगा कि उस पर अधिक मात्रा में लेड (Lead) मिलाया जा रहा है. जिसके बाद देशभर के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने मैगी के सैंपल लेना शुरू किए. दिल्ली के फूड एनालिस्ट ने मैगी में निर्धारित सीमा से अधिक लेड (Lead) पाए जाने पर इसे ‘असुरक्षित’ बताया. साथ ही, पैकेट पर “No Added MSG” लिखे होने के कारण मिसब्रांडिंग का आरोप भी लगाया. इन रिपोर्टों के आधार पर खाद्य सुरक्षा कानून के तहत आपराधिक शिकायतें दर्ज हुईं और संबंधित फूड बिजनेस ऑपरेटर्स को अदालत से समन जारी किए गए.

    विवाद और बिक्री पर रोक

    लेड की अधिकता की खबर आते ही देशभर में हंगामा मच गया. जून 2015 में नेस्ले ने मैगी को बाजार से वापस ले लिया और एफएसएसएआई (FSSAI) ने इसकी बिक्री व उत्पादन पर रोक लगा दी.

    अदालती मोड़ और जांच रिपोर्ट

    अगस्त 2015 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने FSSAI के फैसले को रद्द करते हुए मान्यता प्राप्त लैब से नए सिरे से जांच के निर्देश दिए. नई जांच में लेड की मात्रा तय सीमा के भीतर पाई गई, जिसके बाद नवंबर 2015 में बिक्री दोबारा शुरू हुई. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मैसूर स्थित ‘सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट’ (CFTRI) में जांच कराई गई, जहां मैगी को सुरक्षित पाया गया. इसके बाद No Added MSG मामले पर FSSAI ने 2016 में स्पष्ट किया कि केवल Glutamate पाए जाने से यह सिद्ध नहीं होता कि MSG अलग से मिलाया गया है.

    दिल्ली हाईकोर्ट का रुख

    न्यायाधीश ने धर्मेंद्र हंसराज कोटक व अन्य की याचिकाओं को स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट के समन आदेशों और आपराधिक शिकायतों को रद्द कर दिया. इसका आधार बताया गया कि बॉम्बे हाईकोर्ट, CFTRI और मान्यता प्राप्त लैब्स की रिपोर्ट में लेड सुरक्षित सीमा में मिला था.

    हालांकि कोर्ट ने यह नहीं कहा कि 2015 के सैंपलों में लेड था ही नहीं; बल्कि यह माना कि बाद के घटनाक्रमों के कारण अब आपराधिक मुकदमा चलाने का कोई मजबूत साक्ष्य या विधिक आधार शेष नहीं बचा है. अगर इस केस को आगे बढ़ाया जाता है तो कानूनी प्रक्रिया का दूरुपयोग होगा.

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    मैगी नुडल्स
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