रांची : दुर्गा पूजा और दशहरा 2026 को लेकर झारखंड पुलिस ने राज्यभर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं. सभी उपायुक्तों, रांची, जमशेदपुर और धनबाद के वरीय पुलिस अधीक्षकों तथा सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को भेजे गए पत्र में पूजा पंडालों, मेला, रावण दहन, विसर्जन जुलूस और सोशल मीडिया पर विशेष निगरानी रखने को कहा गया है. इस बार सुरक्षा तैयारियों में पिछले वर्षों में हुए विवाद, साम्प्रदायिक तनाव, विसर्जन के दौरान झड़प, छेड़खानी, आग की घटनाओं और सोशल मीडिया से जुड़े मामलों को भी आधार बनाया गया है.
पत्र के मुताबिक इस वर्ष 11 अक्टूबर 2026 से नवरात्र यानी कलश स्थापना शुरू होगी. इसके बाद पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ेगी. दस्तावेज में महाअष्टमी, नवमी, विजयादशमी, रावण दहन, मेला और प्रतिमा विसर्जन के दौरान संभावित भीड़ को देखते हुए पहले से सुरक्षा और विधि-व्यवस्था की तैयारी पूरी करने पर जोर दिया गया है.
पंडालों से लेकर विसर्जन तक पुलिस की पैनी नजर
सुरक्षा प्लान में सबसे ज्यादा जोर पूजा पंडालों और विसर्जन जुलूस पर दिया गया है. प्रशासन को कहा गया है कि प्रत्येक क्षेत्र में पूजा-अर्चना, सांस्कृतिक कार्यक्रम और मेले वाले स्थानों की सूची तैयार की जाए. इसके साथ ही वहां संभावित भीड़ का आकलन किया जाए.
पुलिस को यह भी जानकारी जुटाने को कहा गया है कि क्षेत्र में कितने लाइसेंसी और गैर-लाइसेंसी पूजा पंडाल हैं और इस वर्ष कहां-कहां नए पंडाल बनाए गए हैं. संवेदनशील पंडालों की अलग सूची तैयार कर वहां अतिरिक्त निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है.
दुर्गा पूजा के नाम पर होने वाली जबरन चंदा वसूली पर भी रोक लगाने को कहा गया है. स्थानीय थानों को पूजा समितियों के साथ बैठक कर नियमों की जानकारी देने और अवैध वसूली पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है.
आग से लेकर भगदड़ तक, हर खतरे पर फोकस
पुलिस के निर्देशों में पूजा पंडालों की अग्नि सुरक्षा को भी प्रमुखता दी गई है. पंडाल निर्माण में नायलॉन, सिंथेटिक और अन्य ज्वलनशील सामग्री का इस्तेमाल नहीं करने की हिदायत दी गई है.
पंडालों में बिजली के तारों से शॉर्ट सर्किट, हवन कुंड की आग और पूजा स्थल पर जल रहे दीपकों के कारण आग लगने की आशंका को देखते हुए पर्याप्त सावधानी बरतने को कहा गया है. सभी पंडालों में अग्निशमन उपकरण रखने और जरूरत पड़ने पर फायर टेंडर के पहुंचने के लिए रास्ता पहले से सुनिश्चित करने का निर्देश है.
भीड़ वाले पंडालों में CCTV और स्क्रीन के जरिए निगरानी तथा जरूरत के मुताबिक ड्रोन कैमरे के इस्तेमाल की बात कही गई है. श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास के रास्ते अलग रखने, महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग प्रवेश-निकास की व्यवस्था करने को कहा गया है.
पंडालों के आसपास पार्किंग नहीं कराने और यातायात को प्रभावित नहीं करने वाली जगह पर पार्किंग की व्यवस्था करने का निर्देश भी दिया गया है.
विसर्जन रूट पहले से तय होगा, अचानक बदलाव नहीं
विसर्जन जुलूस को लेकर पुलिस ने विशेष सावधानी बरतने को कहा है. सभी पूजा समितियों के साथ बैठक कर विसर्जन की तारीख और रूट पहले से तय करने की बात कही गई है.
निर्देश में कहा गया है कि प्रतिमा विसर्जन जुलूस पारंपरिक और निर्धारित मार्ग से ही निकले. ऐसे रास्तों से जुलूस नहीं ले जाया जाए जहां साम्प्रदायिक विवाद की आशंका हो. आपात स्थिति को छोड़कर तय रूट में बिना विचार-विमर्श बदलाव नहीं किया जाए.
हर विसर्जन जुलूस के साथ पुलिस बल और दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति करने तथा जुलूस की वापसी के दौरान भी पुलिस और दंडाधिकारी को मौजूद रखने को कहा गया है. विसर्जन स्थलों और जलाशयों पर प्रशिक्षित तैराकों की तैनाती के साथ गोताखोर और नाव की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया गया है.
मस्जिद, ईदगाह और संवेदनशील इलाकों से गुजरते वक्त DJ पर निगरानी
पुलिस के सुरक्षा निर्देशों में धार्मिक स्थलों और मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों को लेकर भी खास सावधानी बरतने को कहा गया है.
विसर्जन जुलूस के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय की बस्ती, मस्जिद, इमामबाड़ा और ईदगाह के आसपास आपत्तिजनक, उत्तेजक या भड़काऊ गीत-संगीत पर निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है. संवेदनशील इलाकों में वाचर तैनात करने और किसी भी तरह की आपत्तिजनक गतिविधि की सूचना तत्काल वरीय अधिकारियों तक पहुंचाने को कहा गया है.
पुलिस वाहनों में वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था रखने की भी सलाह दी गई है, ताकि किसी घटना की स्थिति में पूरे घटनाक्रम का रिकॉर्ड उपलब्ध रहे.
पुराने विवादों ने बढ़ाई चिंता
दस्तावेज में पिछले वर्षों की घटनाओं का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है. इसका मकसद उन स्थानों और परिस्थितियों की पहचान करना है जहां दुर्गा पूजा, दशहरा या प्रतिमा विसर्जन के दौरान पहले तनाव की स्थिति बन चुकी है.
- गढ़वा में 2025 के दौरान नवरात्रि के मौके पर तोरण द्वार और बैनर को लेकर विवाद का उल्लेख किया गया है. दस्तावेज के अनुसार सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट के बाद सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका बनी थी, हालांकि प्रशासन की सतर्कता से विसर्जन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ.
- गढ़वा के ही एक अन्य मामले में विसर्जन के बाद धार्मिक स्थल के पास देवी-देवताओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने और विरोध करने पर धमकी देने का मामला दर्ज होने का उल्लेख है.
- पलामू के पड़वा क्षेत्र में मूर्ति विसर्जन को लेकर दो पक्षों के बीच मारपीट के मामले का भी जिक्र है. वहीं हैदरनगर में विसर्जन के दौरान प्रशासन और पूजा समिति के बीच DJ बजाने को लेकर विवाद और झड़प का मामला सामने आया था.
- गढ़वा के मंडरिया में 2023 और 2024 में विसर्जन रूट को लेकर विवाद का उल्लेख है. 2024 में तनावपूर्ण माहौल और हिंसक झड़प के बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप कर विसर्जन कराया था.
- गढ़वा के लखना गांव में 2024 में विसर्जन जुलूस का रास्ता रोकने और पत्थरबाजी की घटना का भी दस्तावेज में उल्लेख है.
जमशेदपुर में विसर्जन के दौरान दो लोगों की हुई थी मौत
सुरक्षा दस्तावेज में जमशेदपुर की 2023 की घटना भी दर्ज है. इसके मुताबिक बिष्टुपुर स्थित खरकई नदी के बैली बोधनवाला घाट पर मूर्ति विसर्जन के दौरान पूजा समिति की प्रतिमा को वाहन से उतारने की प्रक्रिया में वाहन चालक की लापरवाही से दुर्घटना हुई थी.
इस घटना में श्रद्धालुओं और बैंड-बाजे से जुड़े लोगों समेत करीब पांच लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे, जबकि दो लोगों की मौत हो गई थी. इस मामले में बिष्टुपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी.
यह घटना इस साल विसर्जन के दौरान वाहनों की सुरक्षित आवाजाही और भीड़ प्रबंधन को लेकर अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत को रेखांकित करती है.
चाईबासा में DJ को लेकर बिगड़ी थी स्थिति
दस्तावेज में चाईबासा की 2022 की घटना का भी उल्लेख है. मूर्ति विसर्जन जुलूस के दौरान DJ पर बजाए जा रहे एक गाने को लेकर विवाद पैदा हुआ था. इसके बाद बड़ी संख्या में लोग जुलूस में शामिल वाहन के पास पहुंच गए और वाहन को रोक दिया गया.
मामले ने दो समुदायों के बीच तनाव की स्थिति पैदा कर दी थी और पुलिस ने पूजा समिति से जुड़े लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था.
इसी तरह हजारीबाग में 2023 में विसर्जन के दौरान दो गुटों के बीच विवाद और पुलिस पर पथराव का मामला दर्ज होने की बात दस्तावेज में है. टंडवा में भी 2023 में मूर्ति विसर्जन के दौरान दो पक्षों के बीच मारपीट का मामला सामने आया था.
छेड़खानी और अपराध रोकना भी चुनौती
सुरक्षा व्यवस्था केवल साम्प्रदायिक तनाव तक सीमित नहीं रखी गई है. भीड़भाड़ वाले पूजा पंडालों और मेला स्थलों पर छेड़खानी, छिनतई और पॉकेटमारी जैसे अपराधों पर विशेष निगरानी रखने को कहा गया है.
पंडाल और मेला स्थल पर खोया-पाया केंद्र बनाने की सलाह दी गई है. छोटे बच्चों की सुरक्षा के लिए उनके जेब में नाम, पता और फोन नंबर की पर्ची रखने की अपील करने को भी कहा गया है.
महिला सुरक्षा के लिहाज से भीड़ वाले इलाकों में पर्याप्त पुलिस बल और सघन गश्ती की व्यवस्था करने पर जोर दिया गया है.
सोशल मीडिया पर अफवाह फैली तो तुरंत कार्रवाई
दुर्गा पूजा 2026 की सुरक्षा रणनीति में सोशल मीडिया मॉनिटरिंग को अहम हिस्सा बनाया गया है. धार्मिक स्थलों, मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों और संवेदनशील स्थानों के साथ-साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी कड़ी नजर रखने के निर्देश हैं.
आपत्तिजनक, उत्तेजक, भ्रामक या अफवाह फैलाने वाली तस्वीर और संदेशों के प्रसार को रोकने तथा ऐसी स्थिति पैदा होने पर तत्काल खंडन जारी करने को कहा गया है.
पुलिस को WhatsApp नंबर और कंट्रोल रूम की व्यवस्था मजबूत करने की सलाह दी गई है, ताकि किसी भी सूचना का तेजी से आदान-प्रदान हो सके.
शराब, जुआ और अवैध गतिविधियों पर भी कार्रवाई
त्योहार के दौरान अवैध शराब, जुआ अड्डों, पशु तस्करी, अवैध बूचड़खानों और प्रतिबंधित मांस से जुड़ी गतिविधियों पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं.
दस्तावेज में शराब के सेवन के बाद जुलूस में शामिल होने को संभावित तनाव का कारण बताते हुए त्योहार के दौरान इस पर प्रभावी रोक लगाने की आवश्यकता जताई गई है.
शांति समिति को बनाया जाएगा अहम कड़ी
प्रशासन को शांति समिति के सदस्यों, जनप्रतिनिधियों और सभी समुदायों के गणमान्य लोगों के साथ बैठक करने का निर्देश दिया गया है. पुराने विवादित बिंदुओं का समाधान त्योहार से पहले ही बातचीत के जरिए करने पर जोर है.
शांति समिति के सदस्यों को अपने-अपने इलाकों में पूजा पंडालों की व्यवस्था पर नजर रखने और छोटी समस्या को स्थानीय प्रशासन की मदद से तत्काल सुलझाने में भूमिका निभाने को कहा गया है. पुलिस को भी निर्देश दिया गया है कि छोटी घटनाओं को नजरअंदाज न किया जाए. किसी भी विवाद की सूचना तत्काल वरीय अधिकारियों और राज्य नियंत्रण कक्ष को दी जाए, ताकि मामला बड़ा होने से पहले ही स्थिति संभाली जा सके.
साफ संदेश: त्योहार शांतिपूर्ण रहे, लेकिन तैयारी में कोई ढिलाई नहीं
दुर्गा पूजा 2026 को लेकर जारी यह विस्तृत सुरक्षा प्लान बताता है कि प्रशासन इस बार केवल पूजा के दिनों में पुलिस बल बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहता. पंडाल से लेकर विसर्जन घाट तक, DJ से लेकर सोशल मीडिया तक और आग से लेकर साम्प्रदायिक तनाव तक हर संभावित जोखिम की पहले से पहचान करने की कोशिश की गई है.
पिछले वर्षों के विवादों और हादसों को सुरक्षा प्लान का हिस्सा बनाकर प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों की निगरानी, निर्धारित विसर्जन रूट, CCTV-द्रोन सर्विलांस, पुलिस-मैजिस्ट्रेट की तैनाती, जलाशयों पर प्रशिक्षित तैराक और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग जैसे उपायों पर जोर दिया है. दस्तावेज में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पूर्व की घटनाओं से जुड़ी सूची विभिन्न स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर तैयार की गई है और उसमें कमी-अधिकता संभव है. इसलिए जिलों को अपने स्तर से भी ताजा आसूचना संकलित करने की सलाह दी गई है.
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