Ranchi : राज्य में लोकायुक्त, मानवाधिकार आयोग, राज्य सूचना आयोग सहित अन्य संवैधानिक पदों पर नियुक्ति के लिए दाखिल जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने नियुक्तियों में हो रही देरी पर सख्त नाराजगी जताई और कहा कि चार साल से ज्यादा समय से सरकार इन संवैधानिक संस्थाओं को निष्क्रिय रख रही है, जो कहीं से भी ठीक नहीं है।
रिक्त पदों को लेकर हाईकोर्ट की चिंता
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि राज्य में लोकायुक्त, मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष, मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त सहित कई संवैधानिक संस्थाओं के पद वर्षों से रिक्त हैं। इन संस्थाओं की निष्क्रियता से जनता के अधिकारों पर असर पड़ रहा है। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अभय मिश्रा ने सरकार के रवैये पर पक्ष रखा।
अगली सुनवाई और सरकार को चेतावनी
हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 23 मार्च निर्धारित की है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि वह जल्द से जल्द इन संवैधानिक संस्थाओं में सभी रिक्त पदों को भरकर संस्थाओं को सक्रिय करे। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अगर नियुक्ति नहीं हुई तो उच्च न्यायालय कड़े आदेश पारित करने के लिए स्वतंत्र होगा।
संवैधानिक संस्थाओं की सक्रियता जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि लोकायुक्त और अन्य आयोगों के बिना राज्य में जनता के सुरक्षा और शिकायत निवारण तंत्र प्रभावित हो रहा है। इसलिए उच्च न्यायालय की चेतावनी सरकार के लिए सावधानी का संकेत है और जल्द कार्रवाई करना अनिवार्य है।
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