वर्ष 2017 में रांची के तत्कालीन प्रधान आयकर आयुक्त तपस कुमार दत्ता समेत आयकर विभाग के अधिकारियों और निजी लोगों के खिलाफ दर्ज सीबीआई केस में जब्त 9.64 लाख रुपये को लेकर रांची की विशेष सीबीआई अदालत ने अहम आदेश दिया है. अदालत ने रकम के दावेदार प्रमोद कुमार धनुका की याचिका मंजूर करते हुए 9,64,410 रुपये रिलीज करने का निर्देश दिया है. अदालत ने यह भी दर्ज किया कि सीबीआई ने इस रकम को अपराध से अर्जित संपत्ति के रूप में दावा नहीं किया है. रकम छतिपूर्ति बांड और समान राशि के दो जमानतदारों की शर्त पर वापस की जाएगी.
क्या था मामला?
यह पूरा प्रकरण मामला संख्या RC 03(A)/2017-D से जुड़ा है. सीबीआई ने 10 जुलाई 2017 को तत्कालीन प्रधान आयकर आयुक्त तपस कुमार दत्ता और अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था. आरोप था कि आयकर अधिकारियों और कुछ निजी व्यक्तियों ने मिलकर कोलकाता से रांची टैक्स असेसमेंट फाइलें ट्रांसफर कराने और करदाताओं को अनुचित लाभ पहुंचाने के एवज में रिश्वत ली थी.
इसी सिलसिले में 12 जुलाई 2017 को सीबीआई ने प्रमोद कुमार धनुका के आवास और उनके भाई सह आरोपी सुबोध धनुका के परिसरों पर छापेमारी की थी. इसी कार्रवाई के दौरान यह नकदी बरामद हुई थी, जिसे बाद में 26 जुलाई 2017 को कॉरपोरेशन बैंक, सीजीओ कॉम्प्लेक्स शाखा, नई दिल्ली में जमा करा दिया गया था.
याचिकाकर्ता प्रमोद कुमार धनुका की ओर से अदालत को बताया गया कि वह इस मामले में आरोपी नहीं हैं. जब्त की गई पूरी रकम उनकी वैध आय का हिस्सा है और उनके घर के कार्यालय कक्ष की दराज से मिली थी. उन्होंने यह भी हवाला दिया कि उनके परिवार पर आर्थिक जिम्मेदारियां हैं और उनके बेटे ने उच्च शिक्षा के लिए बैंक से लोन ले रखा है.
वहीं, सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक ने राशि लौटाने का विरोध किया. सीबीआई का तर्क था कि भविष्य में ट्रायल के अंत में यदि आरोपी सुबोध धनुका दोषी ठहराए जाते हैं, तो यह राशि जुर्माना या अन्य आर्थिक देनदारियों के भुगतान के लिए आवश्यक हो सकती है.
सीबीआई ने इस रकम को अपराध से अर्जित नहीं बताया
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुंदरभाई अंबालाड देसाई बनाम गुजरात राज्य (2002) मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों को ध्यान में रखा. अदालत ने अपने फैसले में यह विशेष रूप से नोट किया कि सीबीआई ने इस 9.64 लाख (9,64,410) को ‘क्राइम प्रोसीड्स’ यानी अपराध से अर्जित संपत्ति के रूप में साबित नहीं किया है. अभियोजन पक्ष के पास इस राशि को रोकने का कोई पर्याप्त कानूनी आधार नहीं था.
रकम लौटाने से पहले पूरी करनी होगी तीन शर्तें
अदालत ने प्रमोद कुमार धनुका के पक्ष में राशि रिलीज करने का आदेश दिया है, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं: जिसमें पहला – याचिकाकर्ता को इतनी ही राशि (9,64,410) का छतिपूर्ति बांड देना होगा, दूसरा – इसी राशि के दो समान जमानतदार प्रस्तुत करने होंगे और तीसरा – भविष्य में यदि अदालत या सीबीआई को किसी कानूनी प्रक्रिया के तहत इस रकम की आवश्यकता होती है, तो उसे वापस जमा कराने का लिखित हलफनामा देना होगा.
इन शर्तों के साथ अदालत ने मामले से जुड़े इस आवेदन का निष्पादन कर दिया है. करीब नौ साल तक सीबीआई की कस्टडी और बैंक में रहने के बाद अब इस रकम के वैध दावेदार को मिलने का रास्ता साफ हो गया है.

