रांची. नेशनल गेम्स के दौरान परिवहन सेवा उपलब्ध कराने के लिए करीब 2.29 करोड़ रुपये की एडवांस राशि लेने से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने एक ट्रांसपोर्ट कारोबारी को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने R.C. No. 02(A)/2022-R में आरोपी याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत का लाभ दिया है. यह मामला सीबीआई की विशेष अदालत, रांची में लंबित है.
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गयी कि वह वर्ष 1980 से Surindra Tourist Transport Services के नाम से व्यवसाय चला रहा है. नेशनल गेम्स के आयोजन के दौरान उसे परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गयी थी. इसी सिलसिले में शर्तों के अनुसार उसे 2.29 करोड़ (2,29,47,900) रुपये एडवांस के तौर पर दिये गये थे.
नेशनल गेम्स की तारीखें बार-बार बदलीं
याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि नेशनल गेम्स की तारीखों में बार-बार बदलाव किया गया. इसके बावजूद वह अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार था. उसकी ओर से यह भी कहा गया कि समझौते की शर्तों के तहत बैंक गारंटी भी उपलब्ध करायी गयी थी और नेशनल गेम्स के आयोजकों अथवा राज्य की ओर से तारीखों में बदलाव के कारण बैंक गारंटी की अवधि भी बढ़ायी गयी थी.
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में दलील दी कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है. ऐसे में अब आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत नहीं है. याचिकाकर्ता ने यह भी भरोसा दिलाया कि वह ट्रायल के दौरान जांच और न्यायिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेगा.
सीबीआई की ओर से रकम वापस नहीं करने का आरोप
दूसरी ओर, विपक्ष की ओर से याचिकाकर्ता की अग्रिम जमानत का विरोध किया गया. विपक्ष के वकील ने अग्रिम जमानत याचिका के पेज नंबर 137 का हवाला देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को एडवांस के रूप में दी गयी राशि को ब्याज समेत वापस करने के लिए पत्र जारी किया गया था. लेकिन कथित तौर पर राशि वापस नहीं की गयी.
विपक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि एडवांस के तौर पर दी गयी पूरी रकम का गबन कर लिया गया. हालांकि, विपक्ष के वकील ने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि याचिकाकर्ता ने जांच के दौरान जांच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग किया या नहीं. उन्होंने यह जरूर स्वीकार किया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है.
कोर्ट ने कहा, विवाद एडवांस राशि से जुड़ा
दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया विवाद उस राशि से संबंधित है, जो याचिकाकर्ता को एडवांस के रूप में दी गयी थी. अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि मामले की जांच पहले ही पूरी हो चुकी है.
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत का लाभ देने का फैसला किया.
अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को आज से 15 दिनों के भीतर संबंधित निचली अदालत के समक्ष सरेंडर करना होगा. सरेंडर या गिरफ्तारी की स्थिति में उसे 25 हजार रुपये के बेल बॉन्ड और इतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करने पर जमानत पर रिहा किया जाएगा.
यह जमानत रांची स्थित AJC, XVIII-cum-Special Judge, सीबीआई की संतुष्टि पर दी जाएगी. कोर्ट ने जमानत को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 482(2) के तहत निर्धारित शर्तों के अधीन रखा है.
किन धाराओं में दर्ज है मामला
याचिकाकर्ता के खिलाफ सीबीआई के R.C. No. 02(A)/2022-R में भारतीय दंड संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज है. इनमें धारा 409, 420, 120-B, 467, 468, 471 और 109 शामिल हैं. इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) के साथ धारा 13(1)(d) के तहत भी आरोप लगाए गए हैं.
मामला रांची की सीबीआई विशेष अदालत में लंबित है.
हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका की मंजूर
झारखंड हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जांच पूरी हो चुकी है और मामले का विवाद मुख्य रूप से एडवांस के रूप में दी गयी रकम से जुड़ा प्रतीत होता है. इन परिस्थितियों में अदालत ने याचिकाकर्ता को गिरफ्तारी से पहले जमानत का संरक्षण देना उचित माना.
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली. आदेश की प्रति संबंधित अदालत को भेजने का निर्देश भी दिया गया है.
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