रांची: देश में आरक्षण खत्म करने को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास अठावले ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अगर देश से जाति व्यवस्था पूरी तरह खत्म हो जाती है, तो वह भी आरक्षण छोड़ने के लिए तैयार हैं. अठावले ने कहा कि जब तक समाज में जाति के आधार पर भेदभाव और असमानता मौजूद है, तब तक आरक्षण खत्म करने की मांग उचित नहीं है.
झारखंड दौरे पर पहुंचे रामदास अठावले ने रांची के मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान आरक्षण और छात्र आंदोलन समेत कई मुद्दों पर अपनी राय रखी.
जाति खत्म होगी तो आरक्षण की जरूरत नहीं
आरक्षण के सवाल पर अठावले ने कहा कि एससी और एसटी के लिए आरक्षण का प्रावधान संविधान में दिया गया है. उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने वंचित और पिछड़े वर्गों को प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए इसकी व्यवस्था की थी.
उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना के आधार पर देश में एससी-एसटी की आबादी करीब 25 फीसदी है, जबकि ओबीसी की आबादी करीब 52 फीसदी बताई जाती है. इस तरह इन वर्गों की आबादी करीब 77 फीसदी बैठती है, जबकि उन्हें मिलने वाला आरक्षण 49.5 फीसदी है.
अठावले ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए दिए गए 10 फीसदी आरक्षण का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इसमें अलग-अलग धर्मों के आर्थिक रूप से कमजोर लोग शामिल हैं. ऐसे में आरक्षण व्यवस्था खत्म करने की मांग पर उन्होंने सवाल उठाया.
उन्होंने साफ कहा कि अगर आरक्षण खत्म करना है, तो पहले जाति व्यवस्था को खत्म करना होगा.
हेमंत सरकार पर साधा निशाना
रामदास अठावले ने झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि झारखंड के निर्माण में शिबू सोरेन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और हेमंत सोरेन भी राजनीति में सक्रिय रहे हैं, लेकिन उनके मुताबिक वर्तमान सरकार के कार्यकाल में दलित और आदिवासी समाज को वह न्याय नहीं मिल रहा है, जिसकी उन्हें उम्मीद है.
छात्र आंदोलन को बताया जायज
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर हुए छात्र आंदोलन पर भी अठावले ने सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि छात्रों से सरकार को पहले ही बातचीत करनी चाहिए थी. उन्होंने आंदोलन के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज किए जाने को भी सही नहीं माना.
अठावले ने कहा कि छात्रों की यह मांग जायज थी कि जिन परीक्षाओं में गड़बड़ी या पारदर्शिता की कमी के आरोप हैं, उनकी जांच होनी चाहिए. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वर्षों से नौकरी कर रहे लोगों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए.
उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिए, जिससे गड़बड़ी से प्रभावित छात्रों को न्याय मिले और साथ ही पहले से नौकरी कर रहे लोगों के हित भी सुरक्षित रहें.
केंद्रीय राज्य मंत्री ने झारखंड में रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि नई नीति बनाकर ज्यादा से ज्यादा युवाओं को नौकरी देने की कोशिश होनी चाहिए. उन्होंने झारखंड में उद्योगों को बढ़ावा देने की जरूरत बताते हुए कहा कि राज्य सरकार को केंद्र सरकार के सहयोग से अधिक से अधिक उद्योग स्थापित करने की दिशा में काम करना चाहिए. उनके मुताबिक उद्योग बढ़ेंगे तो रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
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