जोहार लाइव ब्यूरो
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार 4 सितंबर को एक एमबीबीएस छात्रा की याचिका पर एनआईए को नोटिस जारी किया है. छात्रा ने कोर्ट से चेन्नई स्थित चेट्टिनाड एकेडमी ऑफ रिसर्च एंड एजुकेशन को निर्देश देने की मांग की है कि वह बिना जब्त की गई फीस की दोबारा मांग किए, उसे कोर्स कंप्लीशन सर्टिफिकेट और एमबीबीएस डिग्री सर्टिफिकेट जारी करे. छात्रा की फीस की रकम कथित आतंकी संबंधों के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जब्त कर ली थी. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ इस मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को करेगी.
यह स्पेशल लीव पेटिशन (SLP) पूजा कुमारी नाम की छात्रा ने मद्रास हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले के खिलाफ दायर की है. डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें कॉलेज और मेडिकल काउंसिल के अधिकारियों को छात्रा का कोर्स कंप्लीशन सर्टिफिकेट और एमबीबीएस डिग्री जारी करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया गया था.
छात्रा ने एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान जो फीस जमा की थी, उसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने इस आधार पर जब्त कर लिया था कि फीस की रकम माओवादी गतिविधियों के जरिए जुटाए गए पैसों से दी गई थी।
छात्रा के कोर्स के दौरान उसके बैंक खाते में अलग-अलग समय पर कुल 1,13,70,500 रुपये भेजे गए थे. बाद में आपराधिक जांच के दौरान NIA ने आरोप लगाया कि छात्रा की फीस भरने में इस्तेमाल की गई रकम प्रतिबंधित आतंकी संगठन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) की ओर से अवैध और जबरन वसूली के जरिए जुटाए गए पैसों से सीधे हासिल की गई थी.
NIA ने कॉलेज को नोटिस देने के बाद इन पैसों को जब्त कर लिया. इसके बाद कॉलेज ने संस्थान की वैध फीस प्राप्त नहीं होने का हवाला देते हुए छात्रा के शैक्षणिक दस्तावेज रोक लिए.
छात्रा ने कहा, रिकॉर्ड साफ है, बिना विवाद के कोर्स पूरा किया है
छात्रा ने कोर्ट में दलील दी कि शैक्षणिक प्रमाणपत्रों को किसी तरह की सुरक्षा राशि के तौर पर नहीं रोका जा सकता और न ही उन्हें वित्तीय जमा राशि की तरह सामान्य अधिकार के तहत रखा जा सकता है. उसने यह भी कहा कि उसका किसी भी गैरकानूनी या आतंकी संगठन से कोई व्यक्तिगत संबंध या संलिप्तता नहीं है. छात्रा ने कहा कि उसका रिकॉर्ड पूरी तरह साफ रहा है और उसने बिना किसी विवाद के अपना मेडिकल पाठ्यक्रम पूरा किया है.
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा, अपराध से हासिल रकम पर समानता के अधिकार का दावा नहीं कर सकते
मद्रास हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने उसकी अपील खारिज करते हुए कहा कि अगर छात्रा वास्तव में निर्दोष है, तो वह जब्त की गई रकम को रिलीज कराने के लिए स्पेशल NIA कोर्ट का रुख कर सकती है. कोर्ट ने यह भी कहा कि कॉलेज से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह फीस की रकम वापस हासिल करने के लिए NIA के खिलाफ मुकदमा लड़े.
हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही छात्रा NIA के मामले में आरोपी नहीं हो, लेकिन वह अपराध से हासिल रकम के लाभ पर किसी समानता आधारित अधिकार का दावा नहीं कर सकती. कोर्ट के मुताबिक, NIA द्वारा कोर्स की फीस जब्त किए जाने के बाद कॉलेज के रिकॉर्ड में छात्रा की फीस कानूनी तौर पर बकाया मानी जाएगी.
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जब कॉलेज को छात्रा से वास्तव में कोई फीस प्राप्त नहीं हुई है, तब उसे प्रमाणपत्र जारी करने के लिए मजबूर करना न्याय का गंभीर उल्लंघन होगा.
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि NIA की ओर से दाखिल चार्जशीट में छात्रा के परिवार के करीबी सदस्यों, जिसमें उसके भाई और चाचा शामिल हैं, को प्रतिबंधित आतंकी संगठन के लिए जबरन वसूली के जरिए धन जुटाने वाले प्रमुख लोगों के तौर पर नामित किया गया है.
कोर्ट ने कहा कि सिंगल जज ने कॉलेज की वित्तीय स्वायत्तता की रक्षा करते हुए उचित आदेश दिया था. साथ ही छात्रा के लिए यह रास्ता खुला रखा गया था कि वह दोबारा आवश्यक फीस जमा कर अपने प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकती है.
हाईकोर्ट को अपने फैसले में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं मिला और उसने छात्रा की अपील खारिज कर दी. अब सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के इसी फैसले के खिलाफ दायर SLP पर सुनवाई करेगा.
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