Ranchi : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्य भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आज इस सूची की घोषणा की, जिसमें दिशोम गुरु शिबू सोरेन का नाम भी शामिल है। उन्हें विशेष रूप से लोक कल्याण के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया गया।
शिबू सोरेन का राजनीतिक जीवन संघर्ष और जनसेवा की मिसाल रहा। महज 13 वर्ष की उम्र में उनके पिता की हत्या महाजनों ने कर दी थी। इसके बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़कर आदिवासी समाज के हित में सक्रिय हो गए और सूदखोर महाजनों के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत की। 1970 में उन्होंने धान कटनी आंदोलन का नेतृत्व करते हुए आदिवासी समुदाय को संगठित किया।
शिबू सोरेन झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री भी रहे। पहला कार्यकाल मात्र 10 दिन का था। दूसरी बार 28 अगस्त 2008 को वे पांच महीने तक मुख्यमंत्री रहे और 18 जनवरी 2009 को पद से इस्तीफा दिया। तीसरी बार 30 दिसंबर 2009 को मुख्यमंत्री बने, इस बार भी कार्यकाल केवल पांच महीने का रहा।
स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण शिबू सोरेन को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लंबी बीमारी के बाद उन्होंने 4 अगस्त को अंतिम सांस ली। शिबू सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक संरक्षक थे और यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल में कोयला मंत्री भी रह चुके हैं। हालांकि चिरूडीह हत्याकांड में नाम आने के बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके निधन और पद्य भूषण पुरस्कार से सम्मानित होने की खबर ने आदिवासी समाज और उनके समर्थकों में गहरी भावनाओं को जन्म दिया है।

