Patna : बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ती जा रही है। राज्य निर्वाचन आयोग ने साफ कर दिया है कि दिसंबर 2026 से पहले पंचायत चुनाव कराए जाएंगे। इस बार का चुनाव खास इसलिए है क्योंकि पहली बार पूरे बिहार में पंचायत चुनाव ईवीएम (Electronic Voting Machine) से होंगे।
पहले पंचायत चुनाव बैलेट पेपर से होते रहे हैं, लेकिन अब तकनीक के इस्तेमाल से मतदान प्रक्रिया तेज़, पारदर्शी और सुरक्षित होगी। राज्य निर्वाचन आयोग ने एम-3 मॉडल की ईवीएम यूनिट खरीदने की तैयारी शुरू कर दी है। एम-3 ईवीएम में 384 प्रत्याशियों के नाम दर्ज किए जा सकते हैं और छह अलग-अलग पदों के लिए छह बैलेट यूनिट एक साथ जोड़ी जा सकती हैं।
ईवीएम की खरीद पर लगभग 64 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। वहीं, सरकार पहले ही चुनाव आयोजन के लिए करीब 200 करोड़ रुपये मंजूर कर चुकी है, जिसमें सुरक्षा, प्रशासन और कर्मचारियों की तैनाती शामिल है।
ईवीएम के इस्तेमाल से मतदान प्रक्रिया तेज होगी और इस बार चुनाव कम चरणों में सम्पन्न हो सकते हैं। वर्ष 2021 में पंचायत चुनाव 11 चरणों में हुए थे, लेकिन अब प्रक्रिया आसान होगी।
इस बार पंचायत चुनाव में वेबकास्टिंग भी की जाएगी। इससे सभी बूथों पर निगरानी रखी जा सकेगी, खासकर संवेदनशील और अति संवेदनशील क्षेत्रों में।
एक और बड़ी खासियत है नया आरक्षण रोस्टर। पिछले चुनावों (2016 और 2021) में वही रोस्टर लागू था, लेकिन 2026 में नया रोस्टर लागू होगा। कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होगा। इससे कई सीटों पर समीकरण बदल सकते हैं।
बिहार में इस बार पंचायत चुनाव 2,55,379 पदों के लिए होंगे। इनमें सबसे अधिक संख्या पंच और वार्ड सदस्य की है (प्रत्येक 1,13,307 पद)। इसके अलावा मुखिया और ग्राम कचहरी सरपंच के 8,053-8,053 पद, पंचायत समिति सदस्य के 11,497 पद और जिला परिषद सदस्य के 1,162 पद होंगे।
राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि ईवीएम, वेबकास्टिंग और नया आरक्षण रोस्टर इस चुनाव को तकनीक और पारदर्शिता के लिहाज से ऐतिहासिक बनाएंगे।


