Johar Live Desk : पूरे देश आज यानी शुक्रवार को बसंत पंचमी का पर्व बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन ज्ञान, बुद्धि और वाणी की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है। खासतौर पर छात्रों, शिक्षकों और कला व रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए बसंत पंचमी का विशेष महत्व माना जाता है। बसंत पंचमी के साथ ही बसंत ऋतु का आगमन होता है। इस दिन पीले रंग का खास महत्व होता है, जो खुशी, ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से मां सरस्वती की पूजा करने से पढ़ाई में मन लगता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
बसंत पंचमी 2026: पूजन मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, बसंत पंचमी की तिथि आज रात 2 बजकर 28 मिनट से शुरू हुई है और इसका समापन 24 जनवरी को रात 1 बजकर 46 मिनट पर होगा। मां सरस्वती की पूजा के लिए आज सुबह 7 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक का समय सबसे शुभ माना गया है।
शुभ योग और अबूझ मुहूर्त
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, नया वाहन खरीदने या किसी नए काम की शुरुआत के लिए अलग से शुभ समय देखने की जरूरत नहीं होती। इस वर्ष बसंत पंचमी पर परिधि योग, शिव योग और रवि योग बन रहे हैं, जो सफलता, प्रतिष्ठा और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाले माने जाते हैं। रवि योग आज दोपहर 2 बजकर 33 मिनट से अगले दिन सुबह 7 बजकर 13 मिनट तक रहेगा।
पूजन विधि
बसंत पंचमी के दिन स्नान कर साफ और संभव हो तो पीले वस्त्र पहनें। घर के मंदिर में मां सरस्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। उन्हें पीले फूल, हल्दी, अक्षत और मिठाई अर्पित करें। पूजा के समय किताबें, कॉपी और वाद्य यंत्र मां के पास रखना शुभ माना जाता है। अंत में ज्ञान, बुद्धि और सफलता का आशीर्वाद मांगे।
बच्चों और शिक्षा के लिए खास दिन
बसंत पंचमी को बच्चों की पढ़ाई की शुरुआत के लिए बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन छोटे बच्चों को पहली बार लिखना सिखाना लाभकारी माना जाता है। साथ ही जरूरतमंद बच्चों को किताबें, कॉपी और पेन दान करना भी पुण्यदायी माना गया है।
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