Ranchi : धनबाद में गर्मी की शुरुआत के साथ ही संभावित जल संकट को लेकर नगर निगम एक्शन मोड में आ गया है। हर साल की तरह इस बार भी लोगों को सुचारू जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। हालांकि, सवाल यह है कि क्या यह सक्रियता सिर्फ गर्मी के मौसम तक ही सीमित रह जाती है। नगर आयुक्त आशीष गंगवार के अनुसार, जिन इलाकों में पाइपलाइन बिछाने का कार्य पूरा हो चुका है, वहां जल्द जल आपूर्ति शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, लंबित एनओसी से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के लिए अधिकारियों को कहा गया है, ताकि योजनाएं समय पर पूरी हो सकें। गर्मी में बढ़ती पानी की किल्लत को देखते हुए निगम ने चापाकलों की मरम्मत पर भी फोकस बढ़ा दिया है। खराब पड़े चापाकलों की पहचान कर उन्हें जल्द ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उन इलाकों में राहत पहुंचाई जा सके जहां अभी पाइपलाइन की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
दरअसल, धनबाद के शहरी जल संकट की जड़ अधूरी जलापूर्ति योजनाएं बनती जा रही हैं। करोड़ों रुपये की तीन बड़ी योजनाएं अब भी एनओसी के कारण अधर में लटकी हुई हैं। सबसे बड़ी 441 करोड़ रुपये की धनबाद शहरी जलापूर्ति योजना का करीब 75 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, लेकिन इंटेक वेल का निर्माण अब तक नहीं हो पाया है। इसके पीछे दामोदर वैली कॉरपोरेशन (DVC) से अनुमति नहीं मिलना मुख्य कारण बताया जा रहा है। इंटेक वेल के बिना जल आपूर्ति शुरू करना संभव नहीं है, जिससे पूरी योजना फिलहाल ठप पड़ी है।
इसी तरह 166 करोड़ रुपये की कतरास जलापूर्ति योजना का लगभग 60 प्रतिशत कार्य पूरा होने के बावजूद, कतरी नदी में पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़क निर्माण विभाग (RCD) से एनओसी नहीं मिलने के कारण काम रुक गया है। इसका सीधा असर कतरास क्षेत्र के हजारों लोगों पर पड़ रहा है। वहीं, 310 करोड़ रुपये की झरिया जलापूर्ति योजना भी अनुमति प्रक्रिया में देरी के चलते धीमी गति से आगे बढ़ रही है। इन तीनों योजनाओं के अधूरे रहने से शहर में जल संकट की स्थिति और गंभीर होती जा रही है। नगर निगम क्षेत्र में नए जल कनेक्शन देने की प्रक्रिया भी लगभग ठप हो चुकी है। वर्तमान में केवल करीब 39 हजार घरों में ही जलापूर्ति कनेक्शन है, जबकि लक्ष्य डेढ़ लाख से अधिक घरों तक पानी पहुंचाने का था।
वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में लगाए गए लगभग 2700 चापाकलों में से करीब 1450 खराब पड़े हैं। पिछले वर्ष इनकी मरम्मत पर लगभग 74 लाख रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में चापाकल अब भी बंद हैं। हालांकि निगम द्वारा मरम्मत कार्य जारी होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन स्थायी समाधान अब भी दूर नजर आ रहा है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन की ये तैयारियां जमीनी स्तर पर कितनी कारगर साबित होती हैं।
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