Close Menu
Johar LIVE
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Johar LIVEJohar LIVE
    • होम
    • क्राइम
    • राजनीति
    • बिजनेस
    • झारखंड
    • आदिवासी
    • स्पेशल स्टोरी
    • खेल-सिनेमा
    • पब्लिक रिपोर्ट
    • अन्य
    Johar LIVE
    Home»झारखंड»महोत्सव में कलाकारों ने आदिवासी जीवन को कला के माध्यम से किया प्रदर्शित
    झारखंड

    महोत्सव में कलाकारों ने आदिवासी जीवन को कला के माध्यम से किया प्रदर्शित

    Team JoharBy Team JoharAugust 10, 2024No Comments2 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email Copy Link

    रांची: दो दिवसीय आदिवासी महोत्सव में विभिन्न राज्यों के कलाकारों ने आदिवासी जीवन और संस्कृति को कला के माध्यम से प्रस्तुत किया. महोत्सव के दौरान विभिन्न चित्रकला और पेंटिंग कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया और आदिवासी जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाने का प्रयास किया.  इस महोत्सव में संताल परगना की पारंपरिक लोक चित्रकला जादो पटिया की प्रदर्शनी विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रही. जादो पटिया पेंटिंग के माध्यम से संताल समाज के इतिहास, रहन-सहन और खान-पान को दर्शाया गया. इस कला कार्यशाला में नेशनल फेलोशिप अवार्डी नीलम नीरद, अर्पित राज नीरद, निताई चित्रकार, गणपति चित्रकार, दशरथ चित्रकार, दयानंद चित्रकार, जीयाराम चित्रकार जैसे प्रमुख कलाकार शामिल हुए. जादो पटिया और पटकर पेंटिंग की जानकारी डॉ. आरके नीरद ने दी.

    55 कलाकार फाइन आर्ट्स के

    महोत्सव में फाइन आर्ट्स से जुड़े लगभग 55 कलाकारों ने भाग लिया. जिनमें झारखंड की राजधानी रांची और अन्य जिलों से कलाकारों के अलावा वाराणसी, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों से आए कलाकार शामिल थे. झारखंड की प्रमुख कलाओं में सोहराय, कोहबर, जादो पटिया, उरांव पेंटिंग, मॉर्डन आर्ट और समकालीन चित्रकारी प्रमुख रही.

    झारखंडी संस्कृति में सोहराई कला का विशेष महत्व है. हजारीबाग जिले के बादम से उत्पन्न इस कला को ब्रांड बनाने में बुल्लू इमाम और उनके परिवार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. सोहराई कला के माध्यम से प्रकृति और मानव समाज के संबंध को दर्शाने का प्रयास किया जा रहा है. अल्का इमाम, बेलनगिनी रोबर्ट मरियम, उषा पन्ना और प्रमीला किरण लकड़ा ने सोहराई कला को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.

    गौरवशाली परंपरा का इतिहास

    महोत्सव में शांति निकेतन से आए मादी लिंडा ने अपनी अद्भुत कला प्रदर्शनी “जनी शिकार” के नाम से प्रस्तुत की, जो उरांव जनजाति की गौरवशाली परंपरा को दर्शाती है. यह चित्र महिलाओं की भागीदारी को प्रमुखता से दिखाता है और झारखंड में नारी शक्ति के उत्थान का प्रतीक माना जाता है. इस चित्र को महिलाओं ने विशेष रूप से सराहा है.

    आदिवासी महोत्सव कलाकार जीवन प्रतिभा
    Follow on Facebook Follow on X (Twitter) Follow on Instagram Follow on YouTube Follow on WhatsApp Follow on Telegram
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram WhatsApp Email Copy Link
    Previous Articleनाबालिग के साथ छेड़खानी व दुष्कर्म मामले में चार आरोपी गिरफ्तार
    Next Article उत्पाद विभाग ने की छापामारी, अवैध विदेशी शराब के साथ एक गिरफ्तार

    Related Posts

    जोहार ब्रेकिंग

    BREAKING : पेट्रोल बम कांड में रांची पुलिस को मिली बड़ी सफलता, 18 घंटे के अंदर पकड़े गए दोनों आरोपी

    June 17, 2026
    झारखंड

    झारखंड प्रशासनिक सेवा के 88 अधिकारियों का एक साथ तबादला… देखें लिस्ट

    June 17, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    रांची पुलिस की अपील- विदेशी नंबरों से रंगदारी मांगने वालों से रहें सावधान

    June 17, 2026
    Latest Posts

    BREAKING : पेट्रोल बम कांड में रांची पुलिस को मिली बड़ी सफलता, 18 घंटे के अंदर पकड़े गए दोनों आरोपी

    June 17, 2026

    झारखंड प्रशासनिक सेवा के 88 अधिकारियों का एक साथ तबादला… देखें लिस्ट

    June 17, 2026

    रांची पुलिस की अपील- विदेशी नंबरों से रंगदारी मांगने वालों से रहें सावधान

    June 17, 2026

    लातेहार में पुलिस ड्यूटी मीट 2026 का आगाज, डीआईजी बोले- तकनीकी रूप से दक्ष बनाना जरूरी

    June 17, 2026

    सीएम हेमंत के विजन से बदली किस्मत, झारखंड की महिलाओं और किसानों को मिला लंदन-दुबई का बाजार

    June 17, 2026

    Facebook X (Twitter) Instagram
    © 2026 Johar LIVE. | About Us | AdSense Policy | Privacy Policy | Terms and Conditions | Contact Us

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.