एक तरफ जहां स्वास्थ मंत्री इरफान अंसारी स्वास्थ्य को दुरुस्त करने की बात कहते हैं, वहीं दूसरी ओर गुमला के सीएचसी में एक ऐसा मामला सामने आया, जो हर किसी को झकझोर गया. जहां परिजन बेटी शिवानी की उल्टी और सिरदर्द की शिकायत को लेकर पहुचे थे. जिसे रेफर कर दिया गया. रेफर करने के बाद जो एंबुलेस दिया गया वो स्टार्ट ही नहीं हुआ. धक्का देने की कोशिश की गई, लेकिन कोई फाएदा नहीं हुआ. मजबूरन बेटी की जान बचाने की खातिर परिजन उसे पिकअप वैन में लेकर सदर अस्पताल की ओर भागे. लेकिन जब वे सदर अस्पताल पहुंचे तो उन्हे यह मनहूस खबर मिली कि अब उनकी बेटी इस दुनियां में नहीं रही.
तीन घंटे तक इलाज का इंतजार
दरअसल, प्रेम नगर निवासी राज कुमार लोहरा के अनुसार उनकी 15 वर्षीय बेटी शिवानी कुमारी की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी. उसे तेज सिरदर्द और लगातार उल्टियां हो रही थीं. परिवार उसे तत्काल चैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचा.
परिजनों का आरोप है कि बच्ची करीब तीन घंटे तक अस्पताल परिसर में अचेत अवस्था में पड़ी रही, लेकिन इस दौरान न तो कोई चिकित्सक समय पर उसे देखने पहुंचा और न ही उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल रेफर करने के लिए एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई.
उनका यह भी आरोप है कि अस्पताल परिसर में खड़ी सरकारी एंबुलेंस तकनीकी खराबी के कारण चालू नहीं हो सकी. कई लोगों ने उसे धक्का देकर स्टार्ट करने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली. परिजनों का कहना है कि बच्ची की गंभीर हालत के बावजूद अस्पताल में ऑक्सीजन की व्यवस्था भी नहीं कराई गई.
आखिरकार परिजनों ने मजबूर होकर एक निजी पिकअप वैन किराये पर ली. बच्ची को वाहन की केबिन में उसकी मां राजमुनी और अन्य परिजनों की गोद में लिटाकर गुमला सदर अस्पताल ले जाया गया. परिजनों के मुताबिक, रास्ते भर उसकी हालत लगातार गंभीर बनी रही. गुमला सदर अस्पताल पहुंचते ही चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया. घटना के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है.
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
बच्ची की मौत की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण चैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंच गए और अस्पताल का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया. ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. साथ ही उन्होंने चैनपुर CHC में नियमित डॉक्टरों की तैनाती, पर्याप्त नर्सिंग स्टाफ, 24 घंटे ऑक्सीजन की उपलब्धता और हर समय एंबुलेंस सेवा सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई. फिलहाल, परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
इससे पहले इसी साल एंबुलेंस की कमी से हुई मौंत
झारखंड में एंबुलेंस की कमी और समय पर आपातकालीन सेवा नहीं मिलने के आरोपों के बीच कई दर्दनाक घटनाएं सामने आ चुकी हैं. जून 2026 में जामताड़ा में 108 एंबुलेंस नहीं मिलने पर मरीज को ट्रैक्टर से अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां उसकी मौत हो गई. मई 2026 में बोकारो में एंबुलेंस में ऑक्सीजन खत्म होने के आरोप के बीच बच्चे की जान चली गई. इससे पहले चाईबासा में एंबुलेंस नहीं मिलने पर पिता बेटे का शव थैले में लेकर घर जाने को मजबूर हुआ.

