कर्नाटक के हक्की-पिक्की आदिवासी समुदाय के छह सदस्य इन दिनों फिजी में फंसे हुए हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वे अपने पास 10 डॉलर रखने के कारण स्थानीय अधिकारियों की कार्रवाई में फंस गए. इसके बाद से वे फिजी में ही रुके हुए हैं और अब उन्होंने कर्नाटक सरकार, भारत सरकार और भारतीय उच्चायोग से मदद की अपील की है.
रिपोर्ट के अनुसार, फिजी में व्यापार का काम पूरा करने के बाद मनीष, कृष्ण कुमार, मालिनी, चंद्रन वासु, संजना चंद्रन और हरीश संपत 12 जुलाई को भारत लौटने के लिए एयरपोर्ट पहुंचे थे. इसी दौरान कस्टम अधिकारियों ने जांच के दौरान उन्हें रोक लिया.
रिपोर्ट के मुताबिक, उनके पास 10 डॉलर मिलने के बाद अधिकारियों ने उन्हें अपनी हिरासत में ले लिया. इसके चलते उनकी भारत वापसी की उड़ान भी छूट गई और उनके रिटर्न टिकट रद्द हो गए. पिछले दो दिनों से सभी छह लोग फिजी में फंसे हुए हैं.
बताया जा रहा है कि उनके पास 10 डॉलर होने के कारण यह कार्रवाई हुई, जिसके बाद उनकी यात्रा आगे नहीं बढ़ सकी और वे फिजी में ही फंस गए. इस घटना के बाद सभी ने भारत सरकार से जल्द हस्तक्षेप करने की मांग की है.
फ़िजी में एक नियम है कि हवाई जहाज़ के यात्रियों को यात्रा के दौरान 10 डॉलर से ज़्यादा पैसे साथ रखने की इजाज़त नहीं है. अगर वे डॉलर साथ ले जाते हैं, तो उन्हें कस्टम अधिकारियों को इसकी जानकारी देनी होगी.
सरकार से जल्द हस्तक्षेप की मांग
फंसे हुए लोगों ने कर्नाटक सरकार से आग्रह किया है कि वह इस मामले को गंभीरता से लेते हुए फिजी प्रशासन और भारतीय उच्चायोग के साथ समन्वय स्थापित करे. उनका कहना है कि वे लंबे समय से परेशानी का सामना कर रहे हैं और सरकारी सहायता के बिना भारत लौटना संभव नहीं हो पा रहा है.
भारतीय उच्चायोग को भी पूरे मामले की जानकारी दे दी गई है. उम्मीद जताई जा रही है कि राजनयिक स्तर पर बातचीत के जरिए जल्द कोई समाधान निकलेगा और सभी छह लोगों की सुरक्षित स्वदेश वापसी हो सकेगी. हालांकि, अभी तक इस मामले में फिजी प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
कौन हैं हक्की-पिक्की समुदाय
हक्की-पिक्की कर्नाटक का एक घुमंतू आदिवासी समुदाय है, जिसे कर्नाटक की अनुसूचित जनजातियों में शामिल किया गया है. कन्नड़ भाषा में ‘हक्की’ का अर्थ पक्षी और ‘पिक्की’ का अर्थ पकड़ना होता है. पहले इस समुदाय का मुख्य पेशा पक्षियों का शिकार और उन्हें पकड़ना था, लेकिन वन्यजीव संरक्षण कानून लागू होने के बाद उन्होंने यह काम लगभग छोड़ दिया. अब समुदाय के अधिकांश लोग हर्बल दवाएं, आयुर्वेदिक उत्पाद, मसाले, सुगंधित तेल और वन उत्पादों का कारोबार करते हैं. इसी व्यापार के सिलसिले में वे अफ्रीका, एशिया और प्रशांत क्षेत्र के कई देशों की यात्रा करते हैं. समुदाय की अपनी भाषा वागरीबोली है, हालांकि अधिकांश लोग कन्नड़ भी बोलते हैं.
पहले भी विदेशों में फंस चुके हैं हक्की-पिक्की समुदाय के लोग
हक्की-पिक्की समुदाय के लोग हर्बल उत्पाद, मसाले और पारंपरिक वस्तुओं का कारोबार करने के लिए विदेशों की यात्रा करते हैं. बेहतर आजीविका की तलाश में समुदाय के लोग अफ्रीका, एशिया और प्रशांत क्षेत्र के कई देशों में जाते रहे हैं.
इससे पहले वर्ष 2023 में सूडान में गृहयुद्ध के दौरान भी हक्की-पिक्की समुदाय के कई सदस्य वहां फंस गए थे, जिन्हें भारत सरकार के विशेष अभियान के जरिए सुरक्षित वापस लाया गया था. इसके अलावा घाना और मोजाम्बिक जैसे देशों में भी समुदाय के लोगों को वीजा और स्थानीय नियमों से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा था.
फिजी में सामने आया यह नया मामला एक बार फिर विदेशों में काम और कारोबार करने वाले भारतीयों की सुरक्षा और कानूनी सहायता से जुड़े सवाल खड़े कर रहा है. समुदाय के लोगों और उनके परिजनों को उम्मीद है कि राज्य और केंद्र सरकार के हस्तक्षेप से सभी छह लोग जल्द सुरक्षित भारत लौट सकेंगे.
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