आनंद दत्त, जोहार लाइव के लिए
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में लंबे समय से सुलग रहा असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है. पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने को अदालत में चुनौती देते हुए कानूनी नोटिस भेजा है. वहीं, पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने भी संगठन में “सुधारात्मक कदम” उठाने की जरूरत स्वीकार की है. इन घटनाक्रमों ने पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के कुछ महीनों बाद पार्टी के भीतर उभर रही नई दरारों को उजागर कर दिया है.
दरअसल NCP के राष्ट्रीय सचिव और झारखंड प्रदेश अध्यक्ष सच्चिदानंद सिंह ने सुनेत्रा पवार, प्रफुल्ल पटेल और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं चुनाव नोडल अधिकारी बृजमोहन श्रीवास्तव को कानूनी नोटिस भेजा है. इसमें 26 फरवरी को मुंबई में हुए राष्ट्रीय अधिवेशन में सुनेत्रा पवार के चुनाव को “अवैध, अस्तित्वहीन और शून्य” घोषित करने की मांग की गई है.
बीते 9 जुलाई को जारी नोटिस में सच्चिदानंद सिंह ने आरोप लगाया गया है कि सुनेत्रा पवार के चुनाव के दौरान पार्टी संविधान का उल्लंघन किया गया. सिंह का कहना है कि अजित पवार के निधन के बाद 17 फरवरी को हुई बैठक में यह तय हुआ था कि प्रफुल्ल पटेल अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष रहेंगे. लेकिन अगले ही दिन बिना संवैधानिक प्रक्रिया अपनाए नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी गई.
नोटिस में कहा गया है कि राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाने और अध्यक्षीय चुनाव कराने का अधिकार केवल अधिकृत कार्यकारी अध्यक्ष को था, न कि महासचिव को.

चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
सच्चिदानंद सिंह ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान कई अनिवार्य संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया, जिनमें स्वतंत्र केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण की नियुक्ति, चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा, नामांकन आमंत्रित करना और मतदान की प्रक्रिया अपनाना शामिल है.
उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सचिव होने के बावजूद उन्हें न तो अधिवेशन की औपचारिक सूचना दी गई और न ही चुनाव लड़ने या प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिला. उनका दावा है कि उन्होंने अधिवेशन में उपस्थित होकर आपत्ति भी दर्ज कराई थी, लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया गया.
नोटिस में पार्टी नेतृत्व को 15 दिन का समय दिया गया है. इसमें मांग की गई है कि, चुनाव आयोग को भेजे गए दस्तावेज वापस लिए जाएं. सुनेत्रा पवार के चुनाव और पदाधिकारियों की सूची को रद्द किया जाए. इसके अलावा स्वतंत्र केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण बनाया जाए और पार्टी संविधान के अनुसार नए सिरे से संगठनात्मक चुनाव कराए जाएं.
नोटिस में चेतावनी दी गई है कि मांगें नहीं मानी गईं तो सच्चिदानंद सिंह अदालत और चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाएंगे. इस मामले पर NCP की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. हालांकि पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने पत्रकारों से कहा, “अजित पवार के निधन से जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे भरना आसान नहीं है. पार्टी को सुधारात्मक कदम उठाने होंगे.”
जोहार लाइव से बात करते हुए सच्चिदानंद सिंह कहते हैं, ‘’हम दो टर्म के प्रदेश अध्यक्ष और तीन टर्म के नेशनल सेक्रेटरी हैं. संगठन में जो भी फिलहाल निर्णय लिए गए हैं, वो सब पार्टी के संविधान के खिलाफ है. पार्टी के बाहर का कोई सवाल खड़ा करे, उससे पहले मैंने खुद आंतरिक लोकतंत्र को ध्यान में रखते हुए सुनेत्रा पवार के चयन को चुनौती दी है.’’
लोग ये सवाल उठा रहे हैं कि अपरोक्ष तौर पर आप प्रफुल्ल पटेल के निर्देश पर यह सब कर रहे हैं. वरना भला झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष का पड़ी जो सीधे केंद्रीय नेतृत्व को चुनौती दे.
जवाब में सच्चिदानंद सिंह कहते हैं, ‘’इसमें जीरो प्रतिशत सच्चाई है. मैंने तो उन्हें भी नोटिस भेजा है. नोटिस भेजने से पहले मैंने फरवरी माह में ही पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं को चिट्ठी लिखकर जवाब मांगा था, लेकिन आज तक मुझे किसी का जवाब नहीं मिला. जहां तक बात प्रफुल्ल पटेल की है, पार्टी और उम्र, वो मुझसे दोनों में जूनियर हैं. मैं उनसे पहले से पार्टी में हूं. नोटिस का जवाब देने के लिए उनके पास अभी भी 11 दिन बचे हैं, इसके बाद मैं रणनीति तय करूंगा.’’
पार्थ पवार की बढ़ती भूमिका से असंतोष
सूत्रों के मुताबिक, अप्रैल में राज्यसभा सदस्य बनने के बाद पार्थ पवार का पार्टी के संगठनात्मक मामलों में प्रभाव लगातार बढ़ा है. बताया जा रहा है कि वह अपनी मां सुनेत्रा पवार की ओर से कई महत्वपूर्ण फैसले ले रहे हैं, जिससे कई विधायक और पदाधिकारी असहज हैं.
पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि पार्थ पवार जनता के बीच सक्रिय नहीं रहते और संगठन का प्रभावी चेहरा बनने में अभी सफल नहीं हो पाए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा की ओर से कई बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद NCP को अब तक वित्त मंत्रालय वापस नहीं मिला है, जो पहले अजित पवार के पास था.
बताया गया है कि सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार ने हाल ही में नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर इस मुद्दे पर भी चर्चा की थी.
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