झारखंड के जामताड़ा सदर अस्पताल में बीती रात इलाज के अभाव और कथित लापरवाही की वजह से एक-दो नहीं, बल्कि तीन-तीन मरीजों की जान चली गई. इस दर्दनाक घटना के बाद से मृतकों के परिवारों में कोहराम मचा हुआ है और अस्पताल परिसर में लोगों का गुस्सा उबाल पर है. स्थानीय लोग अब अस्पताल की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं.
स्वास्थ्य मंत्री के अपने ही गढ़ में सरकारी स्वास्थ्य सिस्टम दम तोड़ रहा है. जामताड़ा सदर अस्पताल में बीती रात इलाज के अभाव और कथित लापरवाही तीन लोगों की जान चली गयी. परिजनों का इल्जाम हे कि अस्पताल के जनरल वार्ड में रातभर तीन मरीज दर्द से तड़पते रहे, उनके परिजन डॉक्टरों के आगे मिन्नतें करते रहे. एक को तो धनबाद रेफर कर दिया गया, पर दो को देखने तक ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर टस से मस नहीं हुए. सुबह होने से पहले ही तीन घरों के चिराग हमेशा के लिए बुझ गए. दो मरीजों ने सदर अस्पताल में दम तोड़ दिया. वहीं, तीसरे की सांसों की डोर धनबाद पहुंचने से पहले टूट गयी.
मिली जानकारी के अनुसार चापुड़िया के रहने वाले 25 वर्षीय मुन्ना मोहली को सांस लेने में भारी तकलीफ हो रही थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल लाया गया था. चंद्रदीपा निवासी 45 वर्षीय बाबूराम को खून की उल्टियां हो रही थी. इस चलते उन्हें भर्ती कराया गया था. वहीं, मंडलों की रहने वाली पार्वती को सांप ने डस लिया था. उन्हें आनन-फानन में सदर अस्पताल लाया गया, जहां से धनबाद रेफर कर दिया गया. लेकिन धनबाद पहुंचते-पहुंचते उन्होंने भी दम तोड़ दिया.

दूसरी तरफ, जब इस मामले को लेकर बवाल हुआ तो इमर्जेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर एपीएन देव ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उनका कहना है कि मुन्ना मोहली और बाबूराम मरांडी दोनों पहले से ही बहुत गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. परिजन उन्हें बिल्कुल आखिरी वक्त पर अस्पताल लेकर आए थे, जब उनकी हालत बेहद नाजुक हो चुकी थी. डॉक्टर ने दावा किया कि उन्होंने बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन स्थिति हाथ से बाहर थी. हालांकि, जब उनसे सांप काटने वाली मरीज पार्वती दास के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने साफ कह दिया कि उन्हें इस केस के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है.
जामताड़ा सूबे के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी का अपना विधानसभा क्षेत्र है. अभी बीते 19 जून को स्वास्थ्य मंत्री ने पूरे राज्य के सिविल सर्जनों के साथ बैठक की थी और सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए 15 दिनों का कड़ा अल्टीमेटम दिया था. लेकिन अब मंत्री जी के अपने ही जिले का मुख्य अस्पताल इतने गंभीर आरोपों के घेरे में आ गया है.
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