झारखंड में पहली बार एटीएस को नकली नोट मामले में न्यायालय से आरोपी को सजा दिलवाने में सफलता मिली है. एटीएस के विशेष न्यायाधीश कुलदीप की अदालत ने नकली नोट से जुड़े बहुचर्चित मामले में फैसला सुनाते हुए अभियुक्त राजेश भुइयां को सात साल जेल की सजा सुनायी है.
अभियुक्त पर 10,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. अदालत ने राजेश भुइयां को भादवि की धारा 489 बी (किसी जाली या नकली करेंसी नोट को असली जानकर बेचना, खरीदना, प्राप्त करना या उसका इस्तेमाल करना) और 489 सी (कोई व्यक्ति जानबूझकर जाली नोट अपने पास रखता है और उसका इरादा उन्हें असली के रूप में चलाने का होता है) के तहत दोषी पाया था.
क्या है मामला
यह मामला एटीएस थाना कांड संख्या 01/2019 से जुड़ा है. अभियोजन के अनुसार 30 नवंबर 2018 को रांची रेलवे स्टेशन के पास आरोपी राजेश भुइयां को एटीएस की टीम ने गुप्त सूचना पर पकड़ा था. उसके पास से एटीएस ने 2000 रुपये के 204 संदिग्ध नोट बरामद किये गये.
रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड से जब पैसों की जांच कराई गई तो रिपोर्ट में 104 नोट नकली पाये गये थे. बाकि पैसे सही थे. जिसके बाद एटीएस ने पूरे साक्ष्य के साथ न्यायालय में आरोपी के खिलाफ सबूत पेश किए और न्यायालय ने पुख्ता सबूत के आधार पर सजा सुनाया है.
बीते कुछ महीने में झारखंड में नकली नोटों की कई बड़ी खेप बरामद की गई है. जुलाई 2026 में असम के गुवाहाटी रेलवे स्टेशन पर झारखंड के पाकुड़ जिले के दो तस्करों दयाल दास और गुलाब शेख को 7.37 लाख रुपये के नकली नोटों के साथ गिरफ्तार किया गया था. वे गुवाहाटी से नकली नोट लेकर झारखंड में खपाने आ रहे थे.
जुलाई 2026 में रांची के लोअर बाजार थाना क्षेत्र में एक युवक को नकली नोटों के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया. वहीं अगस्त 2025 में रांची पुलिस ने पटना से बस के जरिए आई 2 करोड़ रुपये के नकली नोटों की बड़ी खेप बरामद की थी. इस मामले में रांची के रातू रोड से मो. साबिर और साहिल को गिरफ्तार किया गया था.

