रांची सिविल कोर्ट ने बीते 7 जुलाई को मिशनरी ऑफ चैरिटी को बच्चा बेचने के मामले से आरोप मुक्त कर दिया है. ईसाई समाज ने इस फैसले का स्वागत किया है. पूर्व TAC के सदस्य रतन तिर्की ने इस फैसले पर कहा कि मिशनरीज ऑफ चैरिटी का नाम तब सामने आया जब तथाकथित कुछ फासीवादी ताकतों ने बच्चे चोरी का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा कि इस संस्था की शुरूआत मदर टेरेसा ने किया था, जिसे अब संत मदर टेरेसा कहा जाता है. जिन्हें हर धर्म जाति बीमार व असहाय, कुष्ट रोग से पीड़ित लोगों की सेवा के लिए जाना जाता है. जेल रोड स्थित निर्मल हृदय (मिशनरिज ऑफ चैरिटी) पर कुछ तथाकथित फासीवादी ताकतों ने बच्चे चोरी का आरोप लगाया था, जो पूरी तरह से निराधार था, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया और जिन लोगों ने आरोप लगाया था उनके पास कोई सबूत नहीं था.
उन्होने कहा कि यह संस्था वैसे बच्चों को अपनाती है, जिसे समाज अपनाने से इनकार करता है, यह संस्था वैसे बच्चों के जीवन को बचाने का काम करती थी और उन्हें पालकर बड़ा करने का काम करती है. फासीवादी ताकतों ने समाज के लिए भलाई का काम करने वाले मिशनरीज ऑफ चैरिटी को बदनाम करने की कोशिश की. लेकिन कोर्ट के फैसले ने साबित कर दिया कि फासीवादी ताकतों की योजना कभी सफल नहीं होगी.
वहीं मेयर के लिए चुनाव लड़ चुके प्रवीण कच्छप ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह फैसला सच्चाई के हक में है. रघुबर दास सरकार के समय मिशनरी संस्थाएं फासीवादी ताकतों के लिए आंखों की किरकिरी बन गई थी. उसी समय निर्मल हृदय मिशनरी ऑफ चैरिटी पर बच्चा चोरी का प्लानटेड आरोप लगाया गया था, जिसे कोर्ट ने 8 साल बाद खारिज कर दिया. जो की अच्छा फैसला है. अविवाहित माताओं के द्वारा दिए गए बच्चों को मिशनरिज ऑफ चैरिटी लालन पालन करती है.
प्रवीण कच्छप ने आगे कहा कि निर्मल हृदय में सभी चाहे वह हिंदू, मुस्लिम, सिख और अन्य समाजों का इस संस्था से जुड़ाव है. सभी संस्था में स्वेच्छा से जाते हैं और जो भी मदद पहुंचानी हो, सभी करते हैं. अदालत के इस फैसले ने तथाकथित फासीवादी ताकतों के द्वारा मिशनरिज संस्थाओं को बदनाम करने की योजना को सफल नहीं होने दिया.
क्या था पूरा मामला
निर्मल हृदय मिशनरिज ऑफ चैरिटी से एक नवजात को डेढ़ लाख में बेचने का मामला 3 जुलाई 2018 को सामने आया था. यूपी की दंपति को बच्चा बेचने का आरोप निर्मल हृदय की सिस्टर कौनसिलिया बखला और सिस्टर अनिमा इंदवार पर लगा था. जिसे 7 जुलाई को रांची की सिविल कोर्ट ने फैसला देते हुए सिस्टर कौनसिलिया बखला और सिस्टर अनिमा इंदवार को आरोप से मुक्त कर दिया.

