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    Home»झारखंड»116 साल से सामाजिक सौहार्द की मिसाल, लंगटा बाबा की समाधि पर उमड़ी आस्था की धारा
    झारखंड

    116 साल से सामाजिक सौहार्द की मिसाल, लंगटा बाबा की समाधि पर उमड़ी आस्था की धारा

    Team JoharBy Team JoharJanuary 3, 2026Updated:January 3, 2026No Comments2 Mins Read2
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    Giridih : गिरिडीह जिले के जमुआ प्रखंड स्थित खरगडीहा में 116 वर्षों से परम संत सद्गुरु लंगेश्वरी बाबा (लंगटा बाबा) की समाधि आस्था, इतिहास और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बनी हुई है। हर वर्ष पौष पूर्णिमा के दिन यहां भव्य समाधि पर्व और मेला आयोजित किया जाता है।

    इस वर्ष समाधि पर्व श्रद्धा और अनुशासन के साथ मनाया गया। कार्यक्रम के दौरान चादरपोशी, भंडारा और महालंगर का आयोजन हुआ। सुबह 3:15 बजे जमुआ थाना प्रभारी विभूति देव ने बाबा की समाधि पर पहली चादर चढ़ाई। इसके बाद खोरीमहुआ के एसडीएम अनिमेष रंजन, एसडीपीओ राजेंद्र प्रसाद और जमुआ पुलिस निरीक्षक ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

    समाधि स्थल पर हिंदू-मुस्लिम समाज के लोग परंपरा के अनुसार चादरपोशी करते हैं। सुबह 3:30 बजे से 1 बजे तक हिंदू श्रद्धालुओं ने चादर चढ़ाई, जबकि 1:15 बजे से 5 बजे तक मुस्लिम समाज के लोग समाधि स्थल पर चादर चढ़ाते हैं।

    लंगटा बाबा का इतिहास 1870 के दशक से जुड़ा हुआ है। वे एक वृद्ध संत थे, जिन्होंने नागा साधुओं के साथ इस क्षेत्र में आकर यहां के लोगों के बीच आध्यात्मिक संबंध स्थापित किया। लंग्टा बाबा ने 1910 में पौष पूर्णिमा के दिन महा समाधि ली। उनके अंतिम संस्कार में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों ने अपनी-अपनी परंपराओं के अनुसार भाग लिया, जिससे यह स्थल धर्मनिरपेक्षता और साम्प्रदायिक सौहार्द का प्रतीक बन गया।

    लंगटा बाबा का विश्वास था कि उन्होंने चर्म रोगों का इलाज किया और प्लेग जैसी महामारी के दौरान मानवता की सेवा की। उनके अनुयायी आज भी उनकी समाधि पर मन्नतें पूरी करने आते हैं, और यहां के मेले में लाखों लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं। उनका संदेश ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ समाज में भाईचारे और प्रेम का प्रतीक बना हुआ है।

    A grand event was held in Khargadiha on the occasion of Langta Baba's Samadhi festival.
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