Ranchi : झारखंड में अब महिलाएं सिर्फ घर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे लोन लेकर अपना व्यवसाय बढ़ा रही हैं और परिवार की जरूरतें पूरी कर रही हैं। ताजा बैंकिंग रिपोर्ट के अनुसार, इस वित्तीय वर्ष के सितंबर तक महिलाओं ने 6,446 करोड़ रुपए का लोन लिया है।
पिछले वित्तीय वर्ष 2024 में सितंबर तक महिलाओं ने कुल 20,548 करोड़ रुपए का लोन लिया था, जो इस वित्तीय वर्ष 2025 में सितंबर तक बढ़कर 23,745 करोड़ रुपए हो गया है। इस दौरान सबसे ज्यादा लोन रांची की महिलाओं ने लिया, जो 1,356 करोड़ रुपए तक पहुंचा, जबकि कोडरमा में यह आंकड़ा केवल 44 करोड़ रुपए रहा।
विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं के तेजी से लोन लेने के पीछे कई कारण हैं। सबसे पहले, आर्थिक सशक्तिकरण और स्वयं सहायता समूहों (SHG) का मजबूत नेटवर्क महिलाओं को बिना गारंटी के आसान और कम ब्याज दर पर लोन दिलाता है। इसके अलावा, सरकारी योजनाएं जैसे मुद्रा योजना और आजीविका मिशन भी महिलाओं को लोन लेने में मदद करती हैं।
बैंकों का अनुभव है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में लोन की किश्तें अधिक नियमित और समय पर चुकाती हैं। इसके अलावा, महिलाएं लोन का सही इस्तेमाल करती हैं, जैसे व्यवसाय, आजीविका, बच्चों की पढ़ाई और घर की जरूरतें। इससे लोन डिफॉल्ट का खतरा कम होता है और बैंक का पैसा सुरक्षित रहता है।
इस वित्तीय वर्ष में सबसे ज्यादा लोन देने वाले बैंक हैं:
- बैंक ऑफ इंडिया: 1,463 करोड़
- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया: 1,039 करोड़
- आईसीआईसीआई बैंक: 474 करोड़
- सेंट्रल बैंक: 127 करोड़
- बंदन बैंक: 469 करोड़
- जेआरजीबी बैंक: 227 करोड़
- एक्सिस बैंक: 182 करोड़
झारखंड में पुरुषों के पलायन और अनियमित आय के कारण घर की आर्थिक जिम्मेदारी अब महिलाओं पर बढ़ गई है। इसलिए वे लोन लेकर परिवार की जरूरतें पूरी कर रही हैं। राज्य सचिव, ऑल इंडिया बैंक कनफेडरेशन प्रकाश उरांव के अनुसार, महिलाएं समय पर लोन चुकाती हैं और इसका सही उपयोग करती हैं, जिससे बैंक भी महिलाओं पर भरोसा बढ़ा रहे हैं।
कुल मिलाकर, झारखंड में महिलाओं का लोन लेना और आर्थिक रूप से सशक्त होना राज्य की वित्तीय तस्वीर को बदल रहा है और महिलाओं को परिवार व व्यवसाय दोनों में मजबूत बना रहा है।


