Joharlive Desk : फुटबॉल के इतिहास में 22 जून 1986 की तारीख हमेशा याद रखी जाएगी। इसी दिन अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर डिएगो माराडोना ने इंग्लैंड के खिलाफ फीफा विश्व कप क्वार्टर फाइनल में वह गोल किया, जिसे दुनिया आज भी “हैंड ऑफ गॉड” के नाम से जानती है। यह गोल जितना विवादित था, उतना ही ऐतिहासिक भी साबित हुआ।
फुटबॉल का जादूगर था माराडोना
30 अक्टूबर 1960 को अर्जेंटीना में जन्मे माराडोना को फुटबॉल इतिहास के सबसे महान खिलाड़ियों में गिना जाता है। अपनी शानदार ड्रिब्लिंग, बॉल कंट्रोल, सटीक पासिंग और खेल को पढ़ने की अद्भुत क्षमता के कारण वे दुनिया भर में मशहूर हुए। छोटे कद के बावजूद उनका संतुलन कमाल का था, जिससे वे विरोधी खिलाड़ियों को आसानी से छका देते थे। माराडोना ने अर्जेंटीना के लिए 91 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले और 34 गोल किए। उन्होंने चार फीफा विश्व कप में हिस्सा लिया, लेकिन उनका सबसे यादगार प्रदर्शन 1986 FIFA World Cup में देखने को मिला। इस टूर्नामेंट में उन्होंने अर्जेंटीना की कप्तानी की और टीम को विश्व चैंपियन बनाया। फाइनल में अर्जेंटीना ने पश्चिम जर्मनी को हराया और पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन के लिए माराडोना को गोल्डन बॉल अवॉर्ड दिया गया।
इंग्लैंड के खिलाफ बना इतिहास
22 जून 1986 को मेक्सिको सिटी के एज़्टेका स्टेडियम में अर्जेंटीना और इंग्लैंड के बीच क्वार्टर फाइनल मुकाबला खेला गया। मैच के 51वें मिनट में माराडोना ने ऐसा गोल किया, जो आज भी बहस का विषय बना हुआ है। गेंद हवा में उछली और इंग्लैंड के गोलकीपर पीटर शिल्टन उसे पकड़ने के लिए आगे बढ़े। इसी दौरान माराडोना ने अपने बाएं हाथ से गेंद को गोल में पहुंचा दिया। रेफरी यह नहीं देख पाए और गोल मान्य कर दिया गया। बाद में माराडोना ने कहा कि यह गोल “थोड़ा माराडोना के सिर से और थोड़ा भगवान के हाथ से” हुआ था। इसके बाद यह गोल “हैंड ऑफ गॉड” के नाम से मशहूर हो गया।
‘गोल ऑफ द सेंचुरी’ ने दुनिया को किया हैरान
इस विवादित गोल के सिर्फ चार मिनट बाद माराडोना ने एक और ऐसा गोल किया, जिसने उन्हें अमर बना दिया। उन्होंने अपने ही आधे मैदान से गेंद उठाई, इंग्लैंड के पांच खिलाड़ियों को छकाया और करीब 60 मीटर की दौड़ के बाद शानदार गोल दाग दिया। इस गोल को वर्ष 2002 में FIFA.com के मतदान में “गोल ऑफ द सेंचुरी” यानी सदी का सर्वश्रेष्ठ गोल चुना गया। यही वजह है कि इंग्लैंड के खिलाफ यह मैच फुटबॉल इतिहास के सबसे यादगार मुकाबलों में गिना जाता है।
खिलाड़ी से कोच तक का सफर
खिलाड़ी के तौर पर शानदार करियर के बाद माराडोना ने कोचिंग और प्रबंधन की जिम्मेदारियां भी संभालीं। नवंबर 2008 में वे अर्जेंटीना की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के मुख्य कोच बने और 2010 FIFA World Cup में टीम का नेतृत्व किया। इसके बाद उन्होंने यूएई के क्लब अल वासल, फुजैराह एफसी, बेलारूस के डायनेमो ब्रेस्ट, मैक्सिको के डोराडोस डी सिनालोआ और अर्जेंटीना के जिम्नासिया व एसग्रीमा ला प्लाटा के साथ भी काम किया।
आज भी जिंदा है माराडोना का जादू
25 नवंबर 2020 को माराडोना का निधन हो गया, लेकिन फुटबॉल पर उनकी छाप आज भी कायम है। “हैंड ऑफ गॉड” और “गोल ऑफ द सेंचुरी” जैसे यादगार पलों ने उन्हें खेल इतिहास की सबसे चर्चित और महान हस्तियों में शामिल कर दिया। दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों के लिए माराडोना सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि फुटबॉल के जादूगर थे, जिनका नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाएगा।

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