झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक तकरार देखने को मिली. उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए.
भाजपा ने रिस्तेदारों को दी नौकरी
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने सदन में कहा कि पहली और दूसरी JPSC भर्ती के परिणामों को याद किया जाना चाहिए. उनका आरोप था कि तत्कालीन भाजपा सरकार के दौरान भाजपा नेताओं के रिश्तेदारों को JPSC के जरिए नौकरियां मिली थीं. उन्होंने कहा कि भाजपा को पहले अपने कार्यकाल की भर्ती प्रक्रियाओं पर जवाब देना चाहिए.
सीएम करीबी के घर में एडमिट कार्ड कैसे मिले
वहीं, मंत्री के आरोपों का जवाब देते हुए नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर भर्ती प्रक्रियाओं में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री के करीबी बताए जाने वाले विनोद सिंह के आवास से JSSC-CGL परीक्षा के एडमिट कार्ड बरामद हुए थे. उन्होंने सवाल किया कि जब वह परीक्षा आयोग का कार्यालय नहीं था, तो वहां अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड कैसे पहुंचे.
मरांडी ने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी थी तो सरकार स्वतंत्र CBI जांच कराने से क्यों बच रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जांच से इसलिए पीछे हट रही है क्योंकि इससे कई तथ्य सामने आ सकते हैं.
नेता प्रतिपक्ष ने फरवरी 2026 में जारी JSSC कटऑफ का भी जिक्र करते हुए दावा किया कि अधिक अंक प्राप्त करने वाले कई अभ्यर्थी चयन से बाहर रह गए, जबकि कम अंक पाने वालों का चयन हुआ. उन्होंने JSSC-CGL के सहायक शाखा पदाधिकारी, आपूर्ति पदाधिकारी और अंचल निरीक्षक समेत विभिन्न पदों की भर्ती तथा JPSC परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोप दोहराए.
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