अनुराग
झारखंड में वर्ष 2026 में 1.27 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिलने का दावा किया गया है. दावोस और ब्रिटेन के बाद जुलाई में दिल्ली में 14 समझौतों के जरिए 99,639 करोड़ के प्रस्तावित निवेश की घोषणा हुई. इनमें स्टील, परमाणु ऊर्जा, सौर ऊर्जा, सीमेंट, आईटी और पर्यटन से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं.
लेकिन राज्य में पिछले 25 वर्षों के दौरान भी बड़े निवेश प्रस्ताव और MoU होते रहे हैं. ऐसे में 2026 के इन आंकड़ों से ज्यादा महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि इनमें से कितनी परियोजनाओं को जमीन मिलती है, कितने प्रोजेक्ट का निर्माण शुरू होता है और प्रस्तावित निवेश का कितना हिस्सा वास्तव में झारखंड में आता है.
दावोस से दिल्ली तक, निवेश के बड़े प्रस्ताव
जनवरी 2026 में दावोस में World Economic Forum के दौरान झारखंड सरकार ने निवेशकों से संपर्क किया. इसके बाद ब्रिटेन में भी बैठकों का दौर चला. मुख्यमंत्री सचिवालय के अनुसार इन प्रयासों के बाद MoU और Letter of Intent के जरिए कुल 1,27,055 करोड़ के प्रस्तावित निवेश सामने आए. इनसे 46,555 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की संभावना जताई गई है.
दावोस में Tata Steel के साथ 11,000 करोड़ से अधिक के प्रस्तावित निवेश के लिए समझौता हुआ. कंपनी जमशेदपुर में नई स्टील तकनीक, नई मिल और मौजूदा इकाइयों के विस्तार पर निवेश का प्रस्ताव लेकर आई है.
करीब 7,000 करोड़ प्रदूषण कम करने वाली तकनीक पर खर्च किए जाने का प्रस्ताव है. इसके जरिए घरेलू कोयले और कम गुणवत्ता वाले लौह अयस्क का इस्तेमाल करते हुए स्टील उत्पादन में प्रदूषण कम करने की योजना है.

इसके अलावा करीब 1,500 करोड़ से नई मिल लगाने का प्रस्ताव है, जिसमें अलग-अलग आकार और मोटाई के स्टील उत्पाद बनाए जा सकेंगे.
Jindal समूह ने भी स्टील, परमाणु ऊर्जा और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में चरणबद्ध तरीके से 70,000 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव दिए हैं. इनमें रामगढ़ के पतरातू में सालाना 60 लाख टन क्षमता का स्टील संयंत्र लगाने का प्रस्ताव भी शामिल है.
8 और 9 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में National Stakeholders Consultation आयोजित किया गया. दो दिवसीय कार्यक्रम में उद्योग, आईटी, AI, पर्यटन और सरकारी सेवाओं में तकनीक के इस्तेमाल पर चर्चा हुई.
कार्यक्रम में 14 समझौतों के जरिए 99,639 करोड़ के प्रस्तावित निवेश की घोषणा हुई. इनमें 10 समझौते उद्योग, दो आईटी और दो पर्यटन क्षेत्र से जुड़े थे.
सबसे बड़ा प्रस्ताव Jindal Steel का 40,000 करोड़ का था. Jindal Nuclear Power ने 30,000 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव दिया. इसके अलावा Jindal Renewables, Rungta समूह, Tata Steel, Amalgam Steel and Power, Ambuja Cement और Varun Beverages के साथ भी समझौते हुए.
आईटी क्षेत्र में Google Cloud और Wadhwani Group के साथ डिजिटल सेवाओं, AI और ऑनलाइन सरकारी व्यवस्था से जुड़े समझौते किए गए. पर्यटन क्षेत्र में Tata Motors के साथ खनन पर्यटन और Ease My Trip के साथ राज्य के पर्यटन स्थलों के प्रचार से जुड़े प्रस्तावों पर सहमति बनी.
1.27 लाख करोड़ के प्रस्ताव, लेकिन जमीन पर कितना निवेश?
उल्लेखनीय है कि दिल्ली में हस्ताक्षरित 99,639 करोड़ रुपये के समझौते दावोस और ब्रिटेन दौरों के दौरान घोषित कुल 1.27 लाख करोड़ के प्रस्तावों का ही हिस्सा हैं. कंपनियों के स्तर पर प्रस्तावों के दोहराव के कारण इन दोनों आंकड़ों को अलग-अलग जोड़ना वास्तविक स्थिति से बड़ा आंकड़ा पेश कर सकता है.
इसके अलावा, 99,639 करोड़ का यह आंकड़ा फिलहाल केवल प्रस्तावित निवेश है, कंपनियों द्वारा किया गया वास्तविक खर्च नहीं. किसी भी बड़े उद्योग को जमीन मिलने, पर्यावरणीय स्वीकृतियां जुटाने और निर्माण शुरू करने में लंबा समय लगता है. खासकर परमाणु ऊर्जा जैसी परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी आवश्यक होगी. वर्तमान में अधिकांश परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन, निर्माण की तारीख और चरणबद्ध निवेश की आधिकारिक समयसीमा तय होना बाकी है.
सवाल सिर्फ यह नहीं है कि झारखंड में खनिज कितना है. सवाल यह भी है कि उपलब्ध संसाधनों को निवेश और परियोजनाओं में कितनी तेजी से बदला जा रहा है.

NITI Aayog के Investment Friendliness Index 2026 में झारखंड को 41.3 अंक मिले हैं और वह 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 25वें स्थान पर है. ओडिशा 52.4 अंकों के साथ पांचवें, छत्तीसगढ़ 47.5 अंकों के साथ 12वें, तमिलनाडु 53.3 अंकों के साथ तीसरे और गुजरात 56.6 अंकों के साथ पहले स्थान पर है.
रिपोर्ट में निवेश के माहौल को केवल प्राकृतिक संसाधनों से नहीं, बल्कि infrastructure, business climate, government policy, regulatory ease, institutional environment, financial health और environment resilience जैसे अलग-अलग pillars के आधार पर देखा गया है.
यानी खनिज संपदा के बावजूद निवेश हासिल करने और उसे जमीन पर उतारने के लिए बुनियादी ढांचा, कारोबारी माहौल और प्रशासनिक प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हैं.
25 साल में कई बार हुए बड़े ऐलान, अब नतीजे का इंतजार
झारखंड में बड़े निवेश प्रस्ताव कोई नई बात नहीं हैं. वर्ष 2015-16 में 70,460 करोड़ के शुरुआती समझौते हुए थे. वर्ष 2017 के Momentum Jharkhand में 3.39 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव सामने आए थे. वर्ष 2025 में यूरोप यात्रा के बाद 3,059 करोड़ के निवेश प्रस्तावों की जानकारी दी गई.
अब 2026 में दावोस और ब्रिटेन से जुड़े प्रस्तावों की रकम 1.27 लाख करोड़ बताई गई है. जुलाई में दिल्ली में 99,639 करोड़ के 14 समझौते हुए. इन आंकड़ों से निवेश प्रस्तावों का पैमाना जरूर दिखता है, लेकिन इन्हें सीधे वास्तविक निवेश नहीं माना जा सकता.
किसी MoU या Letter of Intent के बाद परियोजना को जमीन, विभिन्न विभागों की मंजूरी, वित्तीय व्यवस्था, निर्माण और उत्पादन के कई चरणों से गुजरना पड़ता है. इसलिए प्रस्तावित रकम और वास्तविक निवेश के बीच अंतर हो सकता है.
2026 के प्रस्तावों का वास्तविक मूल्यांकन भी परियोजनाओं की प्रगति के बाद ही संभव होगा. खासकर यह देखना होगा कि घोषित परियोजनाओं में से कितनों को जमीन मिलती है, कितनों का निर्माण शुरू होता है और कितनी परियोजनाएं उत्पादन तक पहुंचती हैं.
अब नजर MoU से जमीन तक की यात्रा पर हैं. यह समय ही बताएगा कि 2026 2026 के निवेश प्रस्ताव झारखंड की 25 साल पुरानी निवेश कहानी में एक और घोषणा बनकर रह जाते हैं या वास्तव में जमीन पर नई परियोजनाओं में बदलते हैं.
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