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    Home»बिहार»बिहार में भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी के आरोप में 2 आईपीएस अधिकारी निलंबित
    बिहार

    बिहार में भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी के आरोप में 2 आईपीएस अधिकारी निलंबित

    Team JoharBy Team JoharOctober 19, 2022No Comments4 Mins Read0
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    पटना । बिहार के दो दागी आईपीएस अधिकारियों को राज्य के गृह विभाग ने मंगलवार को निलंबित कर दिया। एक अधिसूचना में कहा गया है कि पूर्णिया के पुलिस अधीक्षक दया शंकर और गया के पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आदित्य कुमार को निलंबित कर दिया गया है।

    2014 बैच के अधिकारी दया शंकर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं।

    आर्थिक अपराध इकाई ने पिछले सप्ताह पूर्णिया और पटना में उनके परिसरों पर छापा मारा था और 71 लाख रुपये से अधिक नकद, आभूषण और अन्य कीमती सामान जब्त किया था। उस पर ईओयू पुलिस स्टेशन, पटना में कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

    आदित्य कुमार का मामला और सनसनीखेज है, क्योंकि उन्होंने गया के कल्याणपुर थाने में दर्ज मामले में क्लीन चिट पाने के लिए कथित तौर पर अपने दोस्त अभिषेक अग्रवाल के साथ मिलकर बिहार के डीजीपी एस.के. सिंघल पर दबाव बनाया था।

    अग्रवाल ने खुद को पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय करोल बताते हुए सिंघल को 30 से अधिक फोन कर प्राथमिकी से आदित्य कुमार का नाम हटाने का दबाव बनाया था। सिंघल ने अंतत: अदालत में रिपोर्ट पेश की, जिसमें उन्होंने उस मामले में ‘तथ्यों की गलती’ का उल्लेख किया और उन्हें क्लीन चिट दे दी।

    उसके बाद आदित्य कुमार ने यहां पुलिस मुख्यालय में एआईजी के रूप में फिर से ड्यूटी ज्वाइन की।

    2011 बैच के आईपीएस अधिकारी आदित्य कुमार जब गया के एसएसपी थे, उन पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था, जिसमें लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल प्रयोग, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर फतेहपुर थाने में दर्ज मामला संख्या 312/2022 के मुताबिक रंगदारी, धोखाधड़ी, जालसाजी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। उनके अलावा फतेहपुर के एसएचओ संजय कुमार भी सह आरोपी थे।

    आदित्य कुमार को क्लीन चिट मिलने के बाद मामले की फाइल मुख्यमंत्री सचिवालय पहुंची, लेकिन अधिकारियों ने इसमें कुछ गड़बड़ पाया और पूरी जांच के लिए इसे ईओयू को स्थानांतरित कर दिया।

    ईओयू के अधिकारियों ने साइबर सेल के अधिकारियों का इस्तेमाल उन फोन नंबरों को स्कैन करने के लिए किया, जिनका इस्तेमाल डीजीपी सहित रिपोर्ट तैयार करने वाले वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को कॉल करने के लिए किया गया था।

    जांच के दौरान दो नंबर – 9709303397 और 9431602303 मिले, दोनों में डिस्प्ले पिक्चर के रूप में मुख्य न्यायाधीश करोल की तस्वीर थी, जिसका इस्तेमाल अग्रवाल ने डीजीपी को कॉल करने के लिए किया था और कई बार डीजीपी ने उन्हें इस नंबर पर कॉल किया था। अग्रवाल ने कभी-कभी उन्हें संदेश भी भेजा और कहा कि वह व्यस्त हैं। डीजीपी ने उनसे फोन पर बात करने के लिए वॉट्सएप पर अपॉइंटमेंट भी लिया था।

    ईओयू के एक अधिकारी ने कहा, “ईओयू ने अभिषेक अग्रवाल और आदित्य कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। उनके अलावा गौरव राज, शुभम कुमार और राजुल रंजन भी इस मामले में सह-आरोपी हैं। हम आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे।”

    जांच के दौरान, यह भी पाया गया कि आदित्य कुमार ने पटना के एक रेस्तरां में अग्रवाल से मुलाकात की, ताकि बाद में मुख्य न्यायाधीश होने का नाटक करने के लिए योजना तैयार की जा सके।

    ईओयू ने अपनी जांच में पाया कि डीजीपी को कॉल करने के लिए इस्तेमाल किए गए फोन नंबर मुख्य न्यायाधीश के नहीं थे, उन्हें निगरानी में रखा गया और ईओयू के अधिकारी अग्रवाल को पकड़ने में कामयाब रहे।

    पूछताछ के दौरान अग्रवाल ने कबूल किया कि पिछले चार साल से उसके आदित्य कुमार के साथ घनिष्ठ संबंध थे और उन्होंने पुलिस अधिकारी को क्लीन चिट दिलाने के लिए साजिश रची थी।

    इस मामले में एक सीरियल अपराधी अग्रवाल को दिल्ली में भी एक मामले का सामना करना पड़ा है, जहां उन्होंने एमसीडी के एक अधिकारी को धमकाने के लिए खुद को केंद्रीय गृहमंत्री का सचिव बताया था। उन्हें 5 दिन के लिए तिहाड़ जेल भी भेजा गया था।

    अग्रवाल ने आईपीएस अधिकारी सौरभ शाह के पिता से भी 1 करोड़ रुपये की उगाही की थी और उनके खिलाफ भागलपुर जिले के कहलगांव थाने में भी आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। वह 2015 में पटना पुलिस थाने के एसएचओ को धमकाने में भी शामिल थे।

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