देश ने नक्सलवाद और माओवादी हिंसा से मुक्त होने का संकल्प पूरा कर लिया है. नक्सलवाद की रीढ़ टूट चुकी है. मार्च 2026 तक देश में कोई भी जिला नक्सलवाद से प्रभावित नहीं रह गया था – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कही.
इस अवसर पर आयोजित एकता परेड में झारखंड जगुआर ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. राज्य से इस विशेष बल के 200 से अधिक पदाधिकारी और जवान समारोह में शामिल हुए. झारखंड जगुआर के जवानों ने मार्च पास्ट किया और एसी छबदान कुमार ने परेड कमांडर की जिम्मेदारी संभाली.
कोई भी जिला नक्सल प्रभावित नहीं
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले साल इसी स्थान से उन्होंने संकल्प लिया था कि जब तक देश नक्सलवाद और माओवादी हिंसा से पूरी तरह मुक्त नहीं हो जाता, तब तक चैन से नहीं बैठेंगे. एक साल बाद उसी स्थान पर आयोजित समारोह में उन्होंने कहा कि देश ने अपना संकल्प पूरा कर लिया है. मोदी ने नक्सल प्रभावित जिलों के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2015 में देश के 126 जिले वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित थे. लेकिन मार्च 2026 तक कोई जिला ऐसा नहीं बचा, जो नक्सलवाद से प्रभावित हो.
उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में दशकों तक हिंसा और खून-खराबा होता रहा, वहां अब विकास की नई तस्वीर दिख रही है. इन क्षेत्रों में सड़कों का विस्तार हो रहा है, मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंच रही है और स्कूलों तथा स्वास्थ्य सुविधाओं तक लोगों की पहुंच बेहतर हो रही है. पहले अनिश्चितता के बीच रहने वाले युवाओं को अब शिक्षा और रोजगार के अवसर मिल रहे हैं. प्रधानमंत्री के मुताबिक, नक्सल प्रभावित रहे इलाकों के लोग अब विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं.
नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश से सशस्त्र नक्सलवाद खत्म हो चुका है, लेकिन अब ‘दिमागी नक्सली’ अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल अफवाह फैलाने और देश की छवि खराब करने के लिए किया जा रहा है. मोदी ने कहा कि देश के नागरिकों को ऐसी कोशिशों के प्रति सतर्क रहना होगा और मिलकर उनका मुकाबला करना होगा.
शहीद जवानों को श्रद्धांजलि, प्रभावित परिवारों का स्वागत
प्रधानमंत्री मोदी ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति बहाल करने के अभियानों में जान गंवाने वाले सुरक्षा बलों के जवानों को श्रद्धांजलि दी. समारोह में नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान शहीद हुए 191 सुरक्षाकर्मियों को भी श्रद्धांजलि दी गई.
मोदी ने कहा कि देश उनके सर्वोच्च बलिदान को हमेशा याद रखेगा. समारोह में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से आए परिवारों का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि इन परिवारों ने हिंसा का दौर देखा है और अब अपने क्षेत्रों में हो रहे बदलाव के साक्षी बन रहे हैं.
नक्सल प्रभावित राज्यों की विशेष फोर्स ने किया मार्च पास्ट
इस बार राष्ट्रीय एकता दिवस परेड में देश के नक्सल प्रभावित रहे राज्यों की एंटी नक्सल फोर्स की टुकड़ियां शामिल हुईं. झारखंड जगुआर के अलावा छत्तीसगढ़ की डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG), आंध्र प्रदेश की ग्रेहाउंड्स, ओडिशा की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG), मध्य प्रदेश की हॉक फोर्स, महाराष्ट्र की C-60 और कर्नाटक की एंटी नक्सल फोर्स सहित विभिन्न विशेष सुरक्षा बलों ने भाग लिया. केंद्रीय सुरक्षा बलों की टुकड़ियां भी परेड का हिस्सा रहीं.
राष्ट्रीय एकता दिवस की इस बार की परेड का एक प्रमुख उद्देश्य देश में सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ चलाए गए अभियानों और इसमें शामिल सुरक्षा बलों के योगदान को प्रदर्शित करना था. केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने 21 अक्टूबर को समारोह की तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया था कि इस बार की एकता परेड में उन राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की टुकड़ियों को शामिल किया जाएगा, जिन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में अग्रिम भूमिका निभाई है.
नक्सल विरोधी अभियानों में झारखंड जगुआर की भूमिका
झारखंड जगुआर झारखंड पुलिस का विशेष एंटी नक्सल बल है. वर्ष 2008 में गठित इस बल ने राज्य के नक्सल प्रभावित और दुर्गम इलाकों में कई अभियानों में हिस्सा लिया है. राज्य में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान जंगलों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में कार्रवाई करना इस बल की जिम्मेदारी रही है. इसके जवानों को ऐसे इलाकों में अभियान चलाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है.
झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ अभियान में झारखंड जगुआर की अहम भूमिका रही है. राज्य पुलिस के इस विशेष बल ने अलग-अलग जिलों में सुरक्षा बलों के साथ मिलकर अभियान चलाए हैं. गुजरात के एकता नगर में राष्ट्रीय एकता दिवस परेड में इसकी भागीदारी झारखंड में नक्सल विरोधी अभियानों में बल के योगदान को राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर बनी.
राष्ट्रीय एकता दिवस हर साल 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर मनाया जाता है. इस वर्ष समारोह में ‘नक्सल मुक्त भारत’ की उपलब्धि और नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में शामिल सुरक्षा बलों के योगदान को विशेष रूप से केंद्र में रखा गया था.


