किसलय शानू
जेपीएससी द्वारा आयोजित विभिन्न परीक्षाओं में गड़बड़ी, टीडीपीएल कंपनी से अवैध वसूली को लेकर सीआइडी ने 12 आरोपियों पर आरंभिक अनुसंधान पूरा कर उनके खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल किया है. इसमें सबसे प्रमुख आरोपी हैं जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांगते.
जोहार लाइव की दूसरी कड़ी में सिर्फ चार्जशीट में आये तथ्यों और गवाहों के बयान के आधार पर एल. ख्यांगते की भूमिका पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित कर रहे हैं. बता दें, चार्जशीट से पहले जोहार लाइव के द्वारा इन बातों का खुलासा किया जा चुका है.
सीआइडी की चार्जशीट के अनुसार एल. ख्यांगते ने संवैधानिक पद पर रहते हुए अपने अन्य सहयोगी उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, सोनू कुमार तथा ब्रज कुमार राम एवं अन्य के साथ मिलकर षडयंत्र के तहत आपराधिक काम किया. उनके द्वारा लैपटॉप एवं फोन को फॉर्मेट कर साक्ष्य को नष्ट करने का प्रयास किया गया. साथ ही भ्रष्ट आचरण अपनाकर जान-बूझकर परीक्षा संचालित करने के लिए दागी एजेंसी का चयन किया.
इसी एजेंसी ने दलालों और एजेंट के साथ मिलकर विभिन्न परीक्षाओं में अनेक अभ्यार्थियों को लाभ पहुंचाया. जिसके कारण जेपीएससी की इंटीग्रिटी प्रभावित हुई. टीडीपीएल कंपनी को नियम से परे जाकर जान-बूझकर मानक प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए टीडीपीएल कंपनी को परीक्षा संचालित करने का पूरा काम किया दे दिया गया.
जिसके बाद टीडीपीएल कंपनी के निदेशक रामबीर सिंह, सत्यपाल सिंह, कर्मचारी उस्मान, एबाद, हेमंत वर्मा, संजय कुमार और प्रदीप सिंह के अलावा अन्य एजेंट के साथ मिलकर पूरा काम किया.
चार्चशीट में इस बात का भी जिक्र है कि चेयरमैन एल. ख्यांगते के द्वारा टीडीपीएल कंपनी के निदेशक सहित अन्य लोगों के साथ मिलकर आपराधिक षडयंत्र को मूर्त रूप दिया गया. इन सबने मिलकर 11 से 13 सिविल सेवा परीक्षा, सीडीपीओ, एसीएफ, एफआरओ, एफएसओ और 14 सिविल सेवा पीटी परीक्षा में बिचौलिये अभय कुमार तिवारी, रवि शंकर, संजीत कुमार, सानंद प्रकाश, लालू यादव एवं के साथ मिलकर संगठित तंत्र के रूप में काम किया और अभ्यार्थियों से करोड़ो रुपये वसूलकर उन्हें परीक्षा में सफल कराया.
इनमें अरविंद कुमार, सौरभ सुमन, रौशन केरकेट्टा, उमाकांत उरांव, पंकज प्रसून, मुकेश साहू, रितिक रौशन, मनोज कुमार, अक्षय कुमार तिवारी, सुषमा कुमारी, दिलीप कुमार, ओम प्रकाश राणा, अरिवंद कुमार यादव और गोपाल कुमार सहित अन्य अभ्यार्थियों को पास कराया.
यहां तक कि मेंस की परीक्षा में उत्तरपुस्तिकाओं में छेड़छाड़ कर, परीक्षा केंद्र से कॉपी बाहर ले जाकर लिखवाया गया और छात्रों को सफल कराया गया. धन का लेन- देन नकद और यूपीआइ तथा आरटीजीएस के माध्यम से किया जाता था. ख्यांगते ने अध्यक्ष पद का गलत उपयोग करते हुए अपने सहयोगी धमेंद्र के माध्यम से दो करोड़ रुपये और बिलिंग पर कमीशन तय कर टीडीपीएल को काम कदे दिया.
टीडीपीएल कंपनी के साथ रुपये के लेन- देन से संबंधित साक्ष्य
मार्च 2025 में अभय तिवारी, रवि मास्टर और धमेंद्र ने मुख्य सचिव आवास में टीडीपीएल निदेशक रामबीर सिंह से डील की. धर्मेंद्र को अध्यक्ष का करीबी और खास आदमी बताया गया.
प्रजेंटेशन से पहले होटल रेडीशन ब्लू में अध्यक्ष ने रामबीर, सत्यपाल व सानंद प्रकाश के साथ बैठक की. यहीं पर टीडीपीएल को काम देने के लिए डील हुई. बैठक के बाद इनके द्वारा टीडीपीएल के संबंधित फाइल श्वेता गुप्ता को देकर इंपैनलमेंट का निर्देश दिया गया.
अनुसंधान में यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि टीडीपीएल को इंपैनलमेंट किये जाने से पूर्व एजेंट एवं कंपनी के निदेशक की अलग- अलग स्थानों पर गुप्त मीटिंग हुई थी. जिसके बाद ही नियमित परीक्षा नियंत्रक असीम किस्पोट्टा के छुट्टी पर रहने के दौरान आपराधिक काम श्वेता कुमारी गुप्ता के साथ मिलकर किया गया.
अनुसंधान में यह स्थापित हुआ है कि रवि शंकर उर्फ रवि मास्टर ने अभय तिवारी के माध्यम से टीपीएल कंपनी के निदेशक को मुख्य सचिव के आवासीय कार्यालय में कार्यरत धर्मेंद्र से मिलवाया था. फिर धमेंद्र के माध्यम से अध्यक्ष से मुलाकात हुई थी. इस काम के बदले अभय तिवारी ने धमेंद्र को 50 हजार रुपये नकद दिये थे.
इंटरव्यू में सेटिंग के संबंधित साक्ष्य
सीआइडी की चार्जशीट के अनुसार एल. ख्यांगते के लैपटॉप बैग से इंटरव्यू में शामिल 15 अभ्यार्थियों नाम, रोल नंबर और पद के नाम के अलावा इंटरव्यू की एक लिस्ट मिली है. सत्यापन करने पर पाया गया कि 10 अभ्यार्थियों का चयन जेपीएससी 11 से 13 वीं परीक्षा में अंतिम रूप से हुआ है. इनमें कश्मीरा हेम्ब्रम, रवि कुमार, महिमा सिंह, जयदीप चौधरी, जनक राज, शालिनी राठी, सेजल सहरावत, विक्की एवं सरिता बारला का नाम अनुसंधान में है.
वहीं सीसीटीवी की जांच करने में उक्त आरोपी परीक्षा के दौरान निष्क्रिय पाये गये हैं. सभी का इंटरव्यू एल. ख्यांगते के बोर्ड में ही हुआ था. अध्यक्ष ने नियमित परीक्षा नियंत्रक असीम किस्पोट्टा से परीक्षा नियंत्रक काम लेकर श्वेता कुमारी गुप्ता को दिया था.


